रेवाड़ी। बावल स्थित प्राइमरी स्कूल जर्जर भवन के एक चौथाई हिस्से में चल रहा है। 8 साल पहले स्कूल के भवन को कंडम घोषित किया गया था। इस भवन के दीवारों में दरारें पड़ चुकी है। बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई दूसरा भवन न होने की वजह से इसी पुराने भवन में अब 25 प्रतिशत हिस्से को नाममात्र मरम्मत करवाई गई है। जिससे पता चलता है कि स्कूल की इमारत का एक बड़ा हिस्सा असुरक्षित है जो छात्रों और शिक्षकों को सीमित स्थान में काम करना पड़ रहा है। यह शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की सुरक्षा दोनों के लिए हानिकारक हो है।
2 साल पहले स्कूल के तीन जर्जर कमरों की छतों की 6 लाख रुपये से मरम्मत कराई गई थी, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। अब इन कमरों में बच्चों की क्लास लग रही है। स्कूल में जगह कम होने की वजह से बच्चों को स्कूल के ही बरामदे में बिठाया जाता है। ऐसे में शिक्षकों को भी बच्चों को पढ़ाने में काफी परेशानी होती है।
स्कूल में पहली से लेकर 5वीं तक करीब 220 बच्चे पढ़ते हैं। मौजूदा समय में स्कूल के मरम्मत की नहीं नया भवन को बनाने की जरूरत है। दीवारों से प्लास्टर टूटकर गिर चुका है। भवन कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकता है। उसके बावजूद प्रशासन ने इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्कूल में शौचालय की स्थिति ठीक ठाक है। मिड डे मील का भी प्रबंध है। वहीं, मरम्मत अधूरी रहने के चलते कक्षा 6वीं से 8वीं तक की पढ़ाई पास ही की पुरानी तहसील में करवाई जा रही है।
जर्जर कमरों में कोई बच्चा ना पहुंचे, शिक्षकों ने बनाई हुई है नजर
जिन स्कूलों के कमरों की हालत खराब है, वहां पर बच्चों को जाने से शिक्षकों ने मना किया हुआ है, क्योंकि वहां पर प्लास्टर जगह-जगह से टूटकर गिरता रहता है। बच्चे भी डर की वजह से कंडम भवनों में नहीं जाते हैं। शिक्षक भी हमेशा नजर बनाए रखते हैं कि कहीं जर्जर कमरों में कोई बच्चा न पहुंच जाए। स्थानीय लोगों ने स्थिति को देखते हुए कई बार नया भवन बनाने की मांग की हैं।
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पूर्व केबिनेट मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने किया था विद्यालय का दौरा
पूर्व केबिनेट मंत्री डॉ. बनवारीलाल ने भी विद्यालय का दौरा किया था और अधिकारियों को स्कूल की मरम्मत के लिए आवश्यक एस्टीमेट बनाकर भेजने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बावल के प्राइमरी स्कूल का रिपोर्ट कार्ड
कंडम घोषित : 8 साल पहले
कक्षा : 50 साल से लग रही
बच्चों की संख्या : 220
कक्षा : 3 कमरों में चल रही
स्टाफ : 11
सुरक्षा : चौकीदार नहीं
सफाई : अस्थाई कर्मचारी के जिम्मे
वर्जन:
क्षेत्र से स्कूल में पढ़कर कई बच्चे आज बड़े पदों पर कार्य कर रहे हैं। जिस तरह से स्कूल की स्थिति बनी हुई है, काफी दयनीय है। इस पर प्रशासन को जरूर ध्यान देना चाहिए। स्कूल में बच्चों की सुरक्षा काफी जरूरी है।
- रामकिशन महलावत
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प्रशासन के लिए बच्चों की सुरक्षा सबसे अहम होनी चाहिए। कंडम भवन में ही नाममात्र मरम्मत करके बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। भवन को नए सिरे से बनाने की जरूरत है। नया भवन तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में बच्चों व शिक्षकों को किसी प्रकार की परेशानी ना आए।
- राम सिंह नंबरदार
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इस स्कूल से पढ़ाई कर कई बच्चे बड़े अफसर और नेता बने हुए है। आज स्कूल में नया भवन बनाने को लेकर प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग रही है कि स्कूल की दशा सुधारी जाए। मगर फिर भी विभाग व प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
- अर्जुन चौकन, उप प्रधान बावल नगर पालिका।
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वर्जन:
कुछ समय पहले ही स्कूल के तीन कमरों की मरम्मत कराई गई थी। जो कमरे एकदम जर्जर हो चुके हैं, वहां पर बच्चों को बिल्कुल भी जाने नहीं दिया जाता है। बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। अभी स्कूल में 220 बच्चे पढ़ रहे हैं। हमारा स्टाफ पूरा है।
- समुंद्र, सिंह, हेड मास्टर
बच्चों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे अहम है। स्कूल की स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा। जल्द ही इसे लेकर उच्च अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
- सुभाष सांभरिया, जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी।
रेवाड़ी। बावल में प्राइमरी स्कूल की जर्जर स्थिति। संवाद
रेवाड़ी। बावल में प्राइमरी स्कूल की जर्जर स्थिति। संवाद