रेवाड़ी। वन और वन्य जीव विभाग की ओर से प्राणवायु देवता पेंशन योजना के तहत जिले में वृक्षों की आयु का आकलन कर रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। विभाग के तीन रेंज रेवाड़ी, बावल व नाहड़ से 350 आवेदन आए थे। इसके बाद विभागीय टीम ने मौके पर जाकर कागज की जांच की।
पेड़ों के तनों की मोटाई के आधार पर उनकी आयु तय की। जांच में 262 पेड़ योजना की शर्तों पर खरे उतरे। इनके भू स्वामियों को अब पेंशन मिली। वर्ष 2023 में शुरू की गई इस योजना के तहत पहले से ही प्रदेशभर के 3819 वृक्षों को पेंशन दी जा रही है। इनमें जिले के 612 पेड़ शामिल हैं। अब नए चयनित पेड़ों के मालिकों के खातों में भी जल्द पेंशन राशि डाली जाएगी।
बता दें कि वन विभाग की ओर से गठित कमेटी ने सभी पेड़ों का भौतिक सत्यापन किया। कमेटी ने आवेदन में दर्ज पेड़ों की वास्तविक उम्र का आकलन किया और पूरी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी थी। योजना में पंचायत, सार्वजनिक, निजी, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों की भूमि पर खड़े 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के स्थानीय वृक्ष शामिल किए जाते हैं। इन वृक्षों की पेंशन राशि बुजुर्गों की पेंशन के बराबर कर दी गई है।
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देखरेख और सुरक्षा पर खर्च होगी पेंशन
पेड़ की सुरक्षा और देखभाल पर यह पेंशन राशि खर्च की जाएगी। समय-समय पर इसमें बढ़ोतरी भी की जाएगी। योजना में केवल स्थानीय प्रजातियों के पेड़ शामिल होते हैं। इनमें खेजड़ी, जांटी-जंड, रोहिड़ा, धोक, जाल, कैर, इंदर जौक, नीम, फ्रास, बरगद, पीपल, अमलतास, खिरन, देशी बेरी व गुलर शामिल हैं। फसली पेड़ों जैसे सफेदा, पॉपुलर, बकैण, शहतूत, आम, मस्कट व अलंथस को योजना में शामिल नहीं किया जाता।
इंसेट
2024 में 941 के करीब आवेदन आए थे
2024 में स्कीम के तहत 941 के करीब आवेदन प्राप्त हुए थे। 680 बूढ़े पेड़ों को चिह्नित करके सालाना पेंशन पेड़ों के मालिकों के खातों में डाल दी गई थी। जिले में 18.70 लाख रुपये की पेंशन डाली गई थी। इस योजना में पेड़ मालिक को सालाना 2750 रुपये की पेंशन दी जाती है। इस धनराशि को पेड़ के लिए खाद देने और देखभाल में खर्च किया जाता है।
जिले में पहले से पेंशन पाने वाले पेड़ों में सबसे अधिक पीपल, बरगद और जांटी है। अब 262 नए पेड़ों को भी सूची में जोड़ा गया है। पेंशन राशि निदेशालय की ओर से सीधे भू-स्वामियों के खातों में भेजी जाएगी।-जितेंद्र सिंह, रेंजर, रेवाड़ी रेंज