मौसम के पहले ही अंधड़ में वीरवार को जिले की बिजली सप्लाई चरमरा गई है। रेवाड़ी और धारूहेड़ा डिवीजन के उपभोक्ता सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। धारूहेड़ा डिवीजन में तो शुक्रवार को भी बिजली सप्लाई सुचारु नहीं हो सकी।
मॉडल टाऊन और अन्य क्षेत्र में शुक्रवार को दस बजे तक बिजली सप्लाई शुरू हो सकी। हालांकि निगम ने गर्मी की शुरूआत से पहले पूरी तैयारी का दावा किया था।
वीरवार को अचानक मौसम में आए बदलाव का खामियाजा बिजली उपभोक्ताओं को उठाना पड़ा। बिजली गुल के चलते शहर की दिल्ली रोड स्थित दर्जनों कॉलोनियों के साथ मॉडल टाऊन, सेक्टर-1 और सेक्टर-4 अंधेर में डूबे रहे। इसका बड़ा कारण बिजली के तारों पर पेड़ गिरने और अनेक जगहों पर बिजली पोल टूटना था।
बिजली फॉल्ट के चलते बिजली सप्लाई करने वाली बड़ी लाइन में भी खराबी आ गई थी। इसके चलते एचवीपीएन के इंजीनियरों को शहर की बिजली सप्लाई रोकनी पड़ी। इतना ही नहीं डीएचवीवीएन की गलती के चलते एचवीपीएन लाइन में भी खराब हो गई थी। विभाग के इंजीनियरों ने पूरी रात कर मेहनत कर सुबह दस बजे तक तक बिजली सुचारु की।
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टूटे थे 3500 बिजली पोल
बीते वर्ष मई-जून महीने में जिले की सभी नो सब डिवीजनों में अधंड़ से करीब 3500 पोल टूट गए थे। कुछ स्थानों पर बिजली सप्लाई सुचारु करने में तीन से चार महीने लग थे। वहीं शहरवासियों को कई दिनों तक बिजली संकट झेलना पड़ा था। इसमें खोल, कोसली और बावल क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहे थे। इतना ही नहीं भिवाड़ी से आने बड़ी ट्रांसमिशन लाइन के भी पांच पोल गिरने से बिजली संकट गहरा गया था। वहीं लूला अहीर से आने वाली लाइन के भी दो बड़े पोल गिर गए थे। जिले में बिजली की सप्लाई महज एक लाइन से आ रही थी। लेकिन निगम ने पिछली गलती से सबक नहंी लिया और फिर से वहीं दिक्कत सामने आने लग गई है।
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मेंटिनेंस और पुराने पोल बदलने की थी योजना
अंधड़ पहली बार नहीं गर्मी के सीजन में हर वर्ष आता है। प्रत्येक वर्ष की तरह निगम ने इस बार भी मेंटिनेंस और पुराने जर्जर पोल बदलने का प्रोजेक्ट तैयार किया था। पहले ही अंधड़ में योजना धरी रह गई। निगम की तरफ से लोड के हिसाब से ट्रांसफार्मर बदलने का भी दावा किया था। बिजली लोड बढ़ते ही शहर में बिजली कट शुरू हो जाते हैं। करीब पंद्रह दिन से शहर में बिजली कट से लोग परेशान हैं।
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मॉडल टाऊन में पूरी रात बिजली नहीं आई। कुछ घंटो के बाद इन्वर्टर ने भी दम तोड़ दिया। बिजली सप्लाई नहीं होने से पूूरी रात खराब होने के साथ सुबह पानी की सप्लाई भी नहीं आ सकी। इसके चलते पानी संकट का भी सामना करना पड़ा। निगम दफ्तर में भी आश्वासन ही मिलता रहा। - सुनील भार्गव, निवासी मॉडल टॉऊन
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यह पहली बार नहीं है जब अंधड़ आने से शहर की बिजली गुल हुई है। निगम की ओर से प्रत्येक वर्ष व्यवस्था ठीक करने का दावा किया जाता है। शहर में पेड़ भी नहीं गिरे और पोल भी नहीं टूटे भी पूरी रात बिजली नहीं आ सकी। बिजली नहीं आने से व्यवसाय पर भी असर पड़ा है। - ज्ञान सैनी, व्यवसायी मोहल्ला रामबास
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आंधी-तूफान प्राकृतिक आपदा है। इस पर किसी का जोर नहीं है, फिर भी निगम को प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए क्विक रेस्पांस टीम का गठन करना चाहिए। बिजली पर जीवन टीका हुआ है। मेरे वार्ड में पूरी रात बिजली नहीं आने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है। अधिकारियों से बात कर आगे से तैयार रहने के लिए कहा गया है। - गुरदयाल नंबरदार, पार्षद, वार्ड-12
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बिजली गुल होने पर समस्या का समाधान तो दूर कर्मचारी फोन तक नहीं उठाते हैं। खासकर रात के समय। अंधड़ बुधवार और वीरवार की रात आया। यदि तैयारी पहले से होती तो जल्द समाधान हो सकता था। बिजली बिल भरने की बात आती है निगम कर्मचारी पुलिस लेकर पहुंच जाते हैं। समाधान के लिए फोन तक नहीं उठाते हैं। - नवीन यादव, निवासी सेक्टर-4
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वर्जन-
तेज अंधड़ के चलते शहर में बिजली सप्लाई रोकी गई थी। जहां पर कोई फॉल्ट था उसे ठीक करा दिया गया है। सुबह के समय सभी जगहों पर लाइन सुचारु करा दी गई थी। निगम व्यवस्था को सुधारने के लिए तत्पर है। - राजकुमार जाजौरिया, एसई बिजली निगम, रेवाड़ी