रेवाड़ी। दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही जिले के कुंभकारों की चाक फिर से घूमने लगी है। मिट्टी से बने दीयों, गुल्लकों और पारंपरिक खिलौनों की मांग बाजार में बढ़ने लगी है। इस बार कुंभकारों को करीब 30 लाख रुपये तक के कारोबार की उम्मीद है।
कुंभकारों ने बताया कि दीयों और मिट्टी के अन्य सामान की तैयारियां दो महीने पहले ही शुरू कर दी गई थीं। पूरा परिवार दिन-रात जुटा हुआ है। महिलाएं और बच्चे भी दीये बनाने, सुखाने और पकाने में सहयोग कर रहे हैं। छोटे दुकानदार अब थोक में माल की बुकिंग कर रहे हैं।
बीते कुछ हफ्तों से खराब मौसम और लगातार बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी थीं। मिट्टी गीली होने के कारण कच्चे दीयों की ढलाई का काम रुक गया था। अब मौसम साफ होने के बाद काम ने फिर रफ्तार पकड़ ली है।
कुंभकार शिवपाल ने बताया कि वह अपने परिवार की मदद से हर दिन करीब 1 हजार दीये बना रहे हैं। दीयों के अलावा गुल्लक, सुराही, प्याले, मटकी, छोटे कलश आदि भी तैयार किए जा रहे हैं।
बढ़ी मांग, बढ़ते दाम
रामकुमार, कुंभकार, लक्ष्मी देवी, रामकुमार प्रजापत ने बताया कि त्योहारों के मौसम में दीयों की मांग हर साल बढ़ जाती है। इस बार कुंभकारों को उम्मीद है कि मांग पिछले वर्षों से कहीं अधिक होगी। इस बार दीयों की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। आमतौर पर दिवाली के दिनों में मिट्टी के दीये 150 से 200 रुपये प्रति सैंकड़ा तक बिकते हैं। बढ़ती मांग और मिट्टी व ईंधन के खर्चे को देखते हुए दाम और ऊपर जाने की संभावना है।
साल भर की कमाई इसी मौसम पर
कुंभकारों के लिए दिवाली का समय साल भर की कमाई का सबसे बड़ा मौका होता है। न सिर्फ उन्हें इससे आर्थिक मजबूती मिलती है बल्कि यह परंपरागत कला को जीवित रखने का जरिया भी है। कई कुंभकार परिवार पूरी तरह से इसी व्यवसाय पर निर्भर हैं।