पोओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन के ऑर्डर पूरे होने में हो रही देरी कैशलेस अभियान को धीमा कर रही है। जिलेभर से 1200 से अधिक व्यापारियों ने विभिन्न बैंक शाखाओं में पीओएस मशीन के लिए आवेदन किया हुआ है, लेकिन मशीनें नहीं मिल पा रही है। वहीं बैंक कर्मियों का कहना है कि अभी मशीनें पहुंचने में 20 से 25 दिन का समय और लग सकता है।
व्यापारियों का तर्क है कि सरकार और प्रशासन एक ओर कैशलेस का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं बैंकों में नोटबंदी के 40 दिन बाद भी कैशलेस संबंधी मशीनों की व्यवस्था नहीं हुई है। व्यापारियों का कहना है कि एक ओर बैंकों में कैश की किल्लत चल रही है, तो दूसरी ओर कैशलेस की व्यवस्था भी नहीं बन पा रही है। ऐसे में व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। डेबिट-क्रेडिट कार्ड लेकर दुकानों पर पहुंच रहे ग्राहकों को मना करना पड़ता है। दुकान में सामान होते हुए भी नहीं बेच पा रहे हैं।
पीएनबी ने भेजे 40 ऑर्डर
अनाजमंडी स्थित पीएनबी शाखा ने अभी तक 12 पीओएस मशीनें वितरित की है। वहीं 30 मशीनों की डिमांड और आई हुई है। डिमांड के हिसाब से बैंक ने 40 मशीनों का ऑर्डर भेजा हुआ है। बैंककर्मियों का कहना है कि मशीनों के एकदम से ऑर्डर बढ़ जाने से उपलब्धता में परेशानी हो रही है। अगले 20 दिनों के बाद लगभग डिमांड पूरी हो जाएगी।
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मैंने एचडीएफसी बैंक में 10 दिन पहले पीओएस मशीन के लिए आवेदन किया था। लेकिन मशीन अभी तक नहीं मिली है। बैंककर्मियों से पूछने पर 20 दिन बाद मशीन उपलब्ध होने की बात कही जाती है। अब बताइए कि कैसे कैशलेस हों व्यापारी और ग्राहक।
अरुण गुप्ता, गिफ्ट गैलरी संचालक
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मेरा खाता यूनियन बैंक में है और मैं कपड़े का व्यापार करता हूं। बैंक में दो बार पीओएस मशीन के लेने के लिए गया हूं। बैंक प्रबंधन ने मशीन बैंक में पहुंचने के बाद ही वितरित करने की बात कही है। हार्ड कैश की किल्लत और स्वैप मशीन की अनुपलब्धता के बीच में हमारा पूरा व्यापार प्रभावित है।
हेमंत भारद्वाज, कपड़ा व्यापारी
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एक ओर बैंकवाले कैशलेस को लेकर जागरुकता अभियान चला रहे हैं। वहीं कैशलेस के उपकरणों की बात आती है, तो बैंकों के पास एक ही जवाब है कि अभी समय लगेगा। अब इस समय चक्कर लगाने में दुकानदारी खत्म हो रही है। यह बात सरकार और प्रशासन किसी को समझ नहीं आ रही।
सचिन बतरा, व्यापारी
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नोटबंदी के बाद एकदम से स्वैप मशीनों की डिमांड बढ़ी है। यह कैशलेस की दिशा में एक अच्छा संकेत है। लेकिन ऑर्डर अधिक हो जाने से मशीनें बनने में देरी हो रही है। अगले एक महीने के अंदर मशीनें बैंकों में प्रयाप्त मात्रा में पहुंच जाएगी।
चंद्रप्रकाश, ब्रांच मैनेजर, पीएनबी