विकास की अंधी दौड़ एवं पानी के अंधाधुंध दोहन के चलते तालाब, कुएं एवं बागड़ी सूखते चले गए। बारिश भी पहले जैसी नहीं हो रही। परिणाम यह हुआ कि जिले में भूजल स्तर 300 फीट तक की गहराई तक पहुंच गया। आलम यह है कि इतनी गहराई से निकाला गया पानी भी पीने योग्य नहीं रह गया है।
दस सालों में बरसात घटकर 560 एमएम तक पहुंच गई है, लेकिन यदि इसे भी भविष्य की प्लानिंग के तहत संचय कर वॉटर रिचार्ज किया जाता तो शायद आज केवल नहरी पानी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। जिले में पानी के श्रोत राजस्थान से निकलने वाली साबी नदी एवं महेंद्रगढ़ से आने वाली कृष्णावती नदी थी। 1994 में साबी नदी में बाढ़ आई थी, इसके बाद कभी इतनी तेज बारिश नहीं हुई और रेवाड़ी सूखे की कगार पर पहुंच चुका है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जिले के पांच ब्लॉकों में से खोल, नाहड़, बावल एवं रेवाड़ी बुरी तरह से प्रभावित हैं अर्थात डार्क जोन क्षेत्रों की सूची में शामिल किए जा चुके हैं,वहीं जाटूसाना ब्लॉक को सेमी डार्क जोन में शामिल किया गया है।
कुछ इस तहर से समझिये भूजल स्तर गिरने का गणित
वर्षों पूर्व भूजल स्तर बनाए रखने के लिए तालाब-बावड़ी को बरसाती पानी से भरा रखा जाता था। वहीं पेयजल के लिए इन तालाबों के पास ही कुएं बनाए जाते थे। लेकिन बरसात की कमी से तालाब-बावड़ी सूखते चले गए। दूसरी ओर घर-घर में लगे सबमर्सिबल पंप एवं सिंचाई के लिए लगी ट्यूबवेल भी भूजल स्तर कम करने का बड़ा कारण है। दस साल पूर्व तक पानी का जिले में भूजल स्तर 50 फीट तक था, लेकिन अब यह बढ़कर 300 फीट तक पहुंच गया है। वहीं जहां पर अभी भी नहरी पानी चलता है और पब्लिक हेल्थ के जलाशय बने हुए हैं वहां पर जल स्तर अभी भी पचास फीट तक है। पब्लिक हेल्थ के अधिकारी के अनुसार जिले में जहां-जहां से जेएलएन नहर होकर गुजरती है वहां पर पानी का लेवल 50 फीट है। इसी के साथ लिसाना एवं कालका में जलाशय होने के कारण गोकलगढ़,बीकानेर,लिसाना,उत्तम नगर एवं कालका में भी भूजल स्तर 50 फीट है। इसका मतलब यह हुआ कि जहां पर वॉटर रिचार्ज हुआ है, या हो रहा है, वहां पर जल स्तर नहीं गिरा है। गौरतलब है कि जिले में 2911 लीटर पानी प्रति मिनट जमीन से पानी निकाला जा रहा है।
इन क्षेत्रों को बिगड़ा हुआ है भूजल स्तर
खोल,बावल, रेवाड़ी जाटूसाना में वाटर रिचार्ज नहीं होने के कारण आलम यह है कि खोल में जिले में सबसे अधिक भूजल स्तर 300 फीट तक गिर गया है। धारूहेड़ा क्षेत्र में 280 फीट, नाहड़ में 250 फीट एवं जाटूसाना में 200 फीट तक भूजल स्तर गिर चुका है।
शहर में सोलहराही एवं बड़ा तालाब बनकर रह गए इतिहास..
शहर के सेक्टर एक स्थित सोलहराही एवं प्राचीन हनुमान मंदिर स्थित बड़ा तालाब भौगोलिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व रखते हैं। सूखा पड़े या बाढ़ आए ये दोनों तालाब शहर के लिए जीवनदायनी साबित होते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से दोनों तालाब सूख चुके हैं। दोनों तालाबों के पास स्थित आज भी कुएं इसका प्रमाण है कि यहां के लोग इनसे अपनी प्यास बुझाते थे। वहीं 1994 मेें साबी नदी में आई बाढ़ से शहर को बचाने में यह दोनों तालाब सहायक सिद्ध हुए थे। वहीं इन दोनों तालाबों के साथ शहर के अन्य तालाब शहर का भूजल स्तर ठीक बनाए रखने का काम भी करते थे। हालांकि प्रशासन की ओर से इन तालाबों में पानी भरकर इन्हें पर्यटन स्थल बनाने की फाइल तैयार की गई थी,लेकिन वह भी चंडीगढ़ से बाहर निकलने का नाम नहीं ले रही है।
अधिकारी बोले अवैध सबमर्सिबलों पर होगी कार्रवाई
जिले का भूजल स्तर डेंजर जोन में जा चुका है। रिचार्ज नहीं होने के कारण जल स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका बड़ा कारण सबमर्सिबल से किया जा रहा पानी का दोहन भी है। उन्होंने कहा कि विभाग अवैध सबमर्सिबल चलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।
अशोक डागर कनिष्ठ अभियंता, पब्लिक हेल्थ विभाग