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Rewari News: स्वच्छ हवा का दम घोंट रहा प्रदूषण

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फोटो : 2सड़क पर मिट्टी पड़ी होने की वजह से वाहन के गुजरने पर उड़ रहा प्रदूषण। संवाद
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प्रवेश चौहान
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रेवाड़ी। स्वच्छ हवा और प्रदूषण नियंत्रण की लड़ाई में रेवाड़ी पिछड़ता नजर आ रहा है। केंद्र सरकार की ओर से देशभर के 130 जिलों की सूची जारी की गई है जहां वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस सूची में रेवाड़ी का नाम शामिल ही नहीं है। जिले में लगातार बढ़ते प्रदूषण, बिगड़ते एक्यूआई और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यहां के लोगों का सांस लेना कठिन कर देता है।
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केंद्रीय एजेंसियों की ओर से स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में नंबर वन आए शहरों ने कई नवाचार अपनाए। इनमें सड़क से सड़क तक पक्कीकरण, मैकेनिकल स्वीपिंग, लिगेसी वेस्ट का बायोरिमेडिएशन, सी एंड डी वेस्ट मैनेजमेंट यानी मलबा निपटान, ग्रीन बेल्ट व मियावाकी वनों का विकास, इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम और उद्योगों में क्लीन फ्यूल ट्रांजिशन शामिल है।
रेवाड़ी इन बिंदुओं पर खरा नहीं उतर रहा। पिछले वर्ष रेवाड़ी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) कई बार खतरनाक स्तर को पार कर गया था। यह आंकड़ा 449 तक पहुंच गया था जो गंभीर श्रेणी में आता है।
चिकित्सकों के अनुसार इतना प्रदूषण न केवल सांस की बीमारियों को बढ़ाता है बल्कि दिल की बीमारियों, एलर्जी और फेफड़ों की समस्याओं का भी बड़ा कारण है। इसके बावजूद जिले में प्रदूषण कम करने के लिए न तो पर्याप्त कदम उठाए जाते हैं और न ही कोई ठोस नीति बनाई गई है। प्रशासन की भी नींद तब खुलती है जब एक्यूआई खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।

प्रदूषण कम करने के उपायों की है कमी
रेवाड़ी में प्रदूषण के प्रमुख कारणों में निर्माण सामग्री का खुले में पड़ा रहना, औद्योगिक इकाई से निकलने वाला अपशिष्ट, सड़कों पर गड्ढे और बढ़ता यातायात है। कई बार खुले में भी कचरा जलाने के मामले सामने आते हैं। स्वीपिंग मशीन का उपयोग तब होता है जब प्रदूषण एक्यूआई के खतरनाक स्तर को पार कर जाता है। पूरे साल खड़ी मशीन धूल फांक रही होती है। पौधरोपण के लिए अभियान चलाया जाता है मगर उसमें भी खानापूर्ति देखने को मिलती है। पौधरोपण अभियान के बाद बिना देखरेख के करीब 50 प्रतिशत पौधे नष्ट हो जाते हैं।

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रामसिंहपुरा में 2.85 लाख टन कचरे का पहाड़
रामसिंहपुरा में 2.85 लाख टन से अधिक का कचरा पड़ा हुआ है। कचरे के निस्तारण का काम अभी तक नहीं हो पाया है। यह कचरा पहाड़ की तरह एक जगह इकट्ठा हो गया है। आसपास के लोगों ने इसका विरोध भी किया। ये प्रदूषण का भी कारण बनता है। यहां पर आग लग जाती है तो कई हफ्तों तक बुझती नहीं है। पूरे जिले की बात करें तो रोजाना 200 टन कूड़ा निकलता है। बता दें कि स्वच्छता रैंकिंग में रेवाड़ी इस बार बुरी तरह पिछड़ा था। राष्ट्रीय स्तर पर 232 अंक और राज्यस्तर पर 46 अंक से रेवाड़ी पिछड़ा है। इस बार राष्ट्रीय स्तर पर 490 और राज्य स्तर पर 57वां स्थान मिला है।
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3 साल में पहली बार ग्रैप-4 की अधिक समय तक लगी थी पाबंदी
2024 में 3 साल में पहली बार अधिक दिनों तक ग्रैप चार की पाबंदियां लगी थीं। 2022 में 3 से 6 नवंबर, 2023 में 5 से 18 नवंबर तक ग्रैप चार की पाबंदियां लगी थीं। 2024 में ग्रैप-4 की पाबंदियां 17 नवंबर से लगाई गई थी जो दिसंबर के पहले सप्ताह तक चली थी। इसकी वजह से स्कूलों तक को बंद करना पड़ा था। 400 पार एक्यूआई पहुंचने पर नागरिक अस्पताल में आंखों में जलन, सांस के रोगी, त्वचा के एलर्जी के मरीज रोजाना 300 के करीब दर्ज किए जा रहे थे।
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