रेवाड़ी। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी अनिल की अदालत ने फैसले में पंजाब आबकारी अधिनियम की धारा 72-सी के तहत दर्ज मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। यह केस लगभग तीन वर्षों तक अदालत में विचाराधीन रहा और 11 मई को इसका अंतिम निर्णय सुनाया गया। यह मामला थाना रामपुरा में दर्ज 3 मार्च 2023 की एफआईआर से संबंधित था, जिसमें होटल मालिक सचिन सहित छह लोगों को आरोपी बनाया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पुलिस गश्त के दौरान एक विशेष सूचना प्राप्त हुई कि होटल में अवैध शराब परोसी जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और वहां कुछ व्यक्तियों को शराब का सेवन करते हुए पाया गया। पुलिस ने मौके से होटल मालिक सचिन सहित शंकर, संजय, लक्ष्मीनारायण, कमल और करमबीर को नामजद किया।
सभी का मेडिकल परीक्षण कराया गया जिसमें शराब सेवन की पुष्टि होने का दावा किया गया। इसके बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और मामले की जांच पूरी कर चालान अदालत में पेश किया गया।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में चार गवाह पेश किए जिनमें पुलिस अधिकारी और मेडिकल ऑफिसर शामिल थे। मुख्य जांच अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि सूचना मिली थी और मौके पर जाकर कार्रवाई की गई थी। वहीं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया गया कि आरोपियों ने शराब का सेवन किया था। डॉक्टर ने अपनी गवाही में कहा कि जांच के दौरान सभी आरोपियों में शराब की गंध पाई गई और उनकी मेडिकल रिपोर्ट में शराब सेवन की पुष्टि हुई।
दूसरी ओर बचाव पक्ष ने अभियोजन के पूरे मामले को चुनौती दी। तर्क दिया कि मौके से किसी भी प्रकार की शराब की बोतल, गिलास या अन्य सामग्री बरामद नहीं हुई। इसके अलावा घटना स्थल की कोई फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस द्वारा प्रस्तुत नहीं की गई। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटना के समय मौजूद किसी भी स्वतंत्र व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया गया, जिससे जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने दलील दी कि केवल मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने कही ये बातें
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। निर्णय में कहा गया कि केवल मेडिकल रिपोर्ट यह साबित नहीं करती कि आरोपी अवैध रूप से शराब परोसने या सार्वजनिक स्थान पर अपराध करने के दोषी हैं। इसके अलावा पुलिस द्वारा किसी प्रकार की शराब की बरामदगी नहीं दिखाई गई और न ही कोई स्वतंत्र गवाह प्रस्तुत किया गया। अदालत ने इसे अभियोजन की गंभीर कमी मानते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इन सभी तथ्यों के आधार पर बरी कर दिया।