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Rewari News: पांच वर्ष तक के बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण निमोनिया

Mon, 25 Nov 2024 02:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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फोटो: 20रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में सांस अ​भियान चलाते चिकित्सक। स्रोत: विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। बच्चों को निमोनिया के खतरों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में सांस अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को निमोनिया से बचाना है। निमोनिया मुख्य रूप से 5 वर्ष तक के बच्चों के फेफड़े को संक्रमित करता है। यही वजह है कि निमोनिया से पांच वर्ष तक के बच्चों की मौत सबसे अधिक होती है।
पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्युदर में 17.5 फीसदी कारण निमोनिया ही है। सर्दी के मौसम में निमोनिया का असर ज्यादा रहता है। सरकारी के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में भी निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब इसे लेकर ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से सांस प्रोग्राम चलाया हुआ है। जिले में यह कार्यक्रम 28 नवंबर तक चलेगा। अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। निमोनिया की शुरुआत आमतौर पर सर्दी, खांसी-जुकाम से होती है। जब फेफड़ों में संक्रमण तेजी से बढ़ने लगता है तो तेज बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ होती है। सीने में दर्द की शिकायत होने लगती है। खांसी और सांस लेने में बहुत दिक्कत हो सकती है। सांस लेते समय पसली चलना और गंभीर लक्षणों में झटके आना, सुस्ती या अधिक नींद आने सहित अन्य शामिल हैं। 2 माह तक के शिशु की प्रति मिनट सांसों की गति 60 से ज्यादा होना। 2 माह से 1 साल तक के शिशु की प्रति मिनट सांसों की गति 50 से ज्यादा होना। 1 साल से 5 साल तक के शिशु की प्रति मिनट सांसों की गति 40 से ज्यादा होना। बच्चे के शरीर को ढककर रखें, सर्दियों में उन्नी कपड़े पहनाएं और जमीन पर नंगे पांव न चलने दें, पीने का पानी ढककर रखे और खाना पकाने और खिलाने से पहले शौच के बाद साबुन से हाथ धोएं, घर में धुआं न होने दें और खिड़कियां खुली रखें, जन्म के के पहले घंटे में स्तनपान और जन्म से 6 माह तक केवल मां का दूध पिलाएं व बच्चे का संपूर्ण और समयानुसार टीकाकरण कराएं।
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क्यों है निमोनिया खतरनाक
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर समस्या है, जिसमें फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। देश में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का ये सबसे बड़ा कारण है। इसलिए घरेलू उपचार में समय ना गवाएं। निमोनिया के लक्षण पहचान कर बच्चे को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर उचित उपचार कराएं। निमोनिया होने पर लंग्स में सूजन आ जाती है और कई ब ई बार पानी भी भर जाता है।
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वर्जन
निमोनिया के निदान, कारण और किस प्रकार बच्चों को ऑक्सीजन दें, इसके लिए मेडिकल अफसरों व अन्य स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है। यह बताया गया है कि किस प्रकार से बच्चों में निमोनिया से होने वाली मृत्युदर को कम कर सकते हैं। वहीं बच्चों के माता-पिता को निमोनिया टीका लगवाने के साथ ही उनको लक्षणों की पहचान करने के बारे में भी बताया जा रहा है। - डॉ. अशोक कुमार, डीआईओ, रेवाड़ी।
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