संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। नगर परिषद की चेयरपर्सन पूनम यादव ने शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर लगाने की अनुमति दी है। अब टेंडर लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पिछले वर्ष 700 से अधिक बंदर पकड़े गए थे।
हाल ही में हुई बैठक में विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने बंदरों को पकड़ने की बात कही थी। आए दिन अस्पताल में कुत्ता और बंदरों के काटने से पीड़ित मरीज आते हैं। नगर परिषद की चेयरपर्सन ने बंदरों को पकड़ने के लिए जल्द टेंडर निकालने की बात कही है।
शहर में सेक्टर एक, सेक्टर चार, गढ़ी बोलनी रोड, शिव कॉलोनी में बंदरों का उत्पात है। बंद घरों में घुस कर सामान उठा ले जाते हैं। अक्सर बंदर लोगों को काट कर जख्मी कर देते हैं।
कुत्ते, बंदर के काटने से लार का संपर्क जब व्यक्ति के खून से होता है तो ये रेबीज वायरस फैलता है। रेबीज से ग्रसित व्यक्ति में लक्षण बहुत दिनों के बाद उभरते हैं। बुखार आना, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, खाना-पीना निगलने में कठिनाई, बहुत अधिक लार निकलना, पानी से डर लगना, पागलपन के लक्षण, अनिद्रा, एक अंग में लकवा होना आदि रेबीज के लक्षण हैं। ज्यादातर लोगों में रेबीज के लक्षण चार से आठ सप्ताह में विकसित होने लगते हैं।
कुत्तों का बधिया करने की नहीं बनाई योजना
रेवाड़ी। शहर में कुत्तों का उत्पात होने के बाद भी नगर परिषद की ओर से कुत्तों का बधिया कराने की योजना नहीं बनाई गई। 2021 में कुत्तों का बंध्याकरण करने के लिए टेंडर जारी किया गया था। 49 लाख रुपये की राशि खर्च की गई थी। इस दौरान भ्रष्टाचार के लिए आरोप लगाए गए थे। यह मामला काफी चर्चा में था। इसके बाद से ही कुत्तों का बधिया कराने को लेकर किसी प्रकार की योजना तैयार नहीं की गई जबकि चार वर्षों में कुत्तों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों काबधिया करना आसान काम नहीं होगा। सेक्टर 1 निवासी मोहन, सुनील व विकास ने बताया कि रात के समय कोई घर से बाहर नहीं निकलता है। कई बार काटने के भी मामले आ चुके हैं।
वर्जन
शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर लगाने की अनुमति दी गई है। टेंडर लगाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। कुत्तों की नसबंदी को लेकर अभी कोई टेंडर नहीं लगाया जा रहा है। इसपर विचार किया जा रहा है। योजना बनने पर यह कार्य भी शुरू कराया जाएगा।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।