रेवाड़ी। जित दूध-दही का खाणा ऐसा म्हारा हरियाणा...की बात धीरे-धीरे पुरानी होती दिख रही है। पश्चिमी सभ्यता की जीवन शैली अपनाने और मोमोज,पिज्जा बर्गर का प्रयोग लोगों को बीमार बना रहा है। इससे अस्पतालों की ओपीड़ी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार दस लाख आबादी वाले जिले में 1989 में जिले के गठन के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को खूब विस्तार हुआ, लेकिन
अब अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विभाग के प्रबंध कम पड़ रहें है।
इसका प्रमुख कारण खानपान है। इन दिनों लोग दाल चावल सब्जी रोटी का संतुलित भोजन खाने के बजाय पेट भरने के लिए पिज्जा, बर्गर, मोमोज समेत अनेक फास्ट फूड से भर रहे हैं। भोजन का सही प्रकार से पाचन न होने से वे बीमारियों के शिकार हो रहे है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल में ही दवाओं पर एक माह में लगभग बीस लाख रुपये खर्च हो रहा है और यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक एक माह में नागरिक अस्पताल में ही लगभग 30 हजार लोगों की ओपीडी हो जाती है। इसके अलावा शहर में चल रहे दर्जनों प्राइवेट अस्पतालों में जाने वाले मरीजों की संख्या भी काफी है। कहने का तात्पर्य यह है हमारे द्वारा अपने स्वास्थ्य को दरकिनार करने के कारण हमें अपनी कमाई का मोटा हिस्सा डॉक्टरों को देना पड़ रहा है। आज विश्व स्वास्थ्य दिवस पर यदि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह मान ली जाए तो महज खानपान एवं लाइफ स्टाइल बदलने मात्र से ही काफी हद तक अपने स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। बदलते लाइफ स्टाइल एवं महज खान-पान की वजह से आलम यह है कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद हम लोगों के लिए प्रर्याप्त डॉक्टर एवं बेड उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
बदली लाइफ स्टाइल ने बनाया दवाई का आदी
स्वास्थ्य को दरकिनार कर व्यक्त शेडयूल एवं कार्य के दवाब में लोगों की जीवन शैली ही बदल दी है। वहीं मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन, वाहनों एवं फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण के चलते भी लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा विपरीत असर पड़ा है। लोगों ने हेल्दी फूड छोड़कर मोमोज, पिज्जा,बर्गर एवं फ्राइड फूड्स की ओर रुख अपना लिया है। इससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा हैं। जिले में की सत्तर फीसदी से ज्यादा आबादी गांवों में रहती है। वहां पर जीवन शैली बदलने के कारण एवं साफ पानी, सफाई के अभाव में बीमारियां बढ़ती जा रही हैं।
दवाई से कुछ यूं मिल सकता है छुटकारा
जिले के लोगों को बीमारी से बचने के लिए छोटी-छोटी बातों को अपनाकर स्वास्थ्य को अच्छा किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी स्थिति में सुबह का नाश्ता नहीं छोड़ना चाहिए। बीमारियों की शुरूआत बस यहीं से शुरू होती है। जीवन के लिए सबसे जरूरी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है,लेकिन हम ऑक्सीजन के सबसे सोर्स पानी को भूल जाते हैं,जबकि पानी खूब पीने से शरीर में उत्पन्न टोक्सिक पदार्थ पसीना एवं मूत्र से निकल जाते हैं। वहीं आधुनिक जीवन शैली में देर से सोना एवं देर से उठन िसबसे खतरनाक है। विशेषज्ञों की माने तो कम सोने के चलते दिमाग कमजोर पड़ने लग जाता है। वहीं देर से सोने से पाचक तंत्र खराब होने के साथ अन्य क्रियाएं खड़बड़ा जाती हैं। व्यायाम एक ऐसा साधन हैं,जिसमें बिना पैसे खर्च किए ही अपने स्वास्थ्य को ठीक रखा जा सकता है। लेकिन गांव हो या शहर लोगों ने व्यायाम की ओर ध्यान देना ही कम कर दिया है।
जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए एक नागरिक अस्पताल, पांच सीएचसी, 13 पीएचसी, 104 सब सेंटर, तीन अर्बन हेल्थ सेंटर एवं आयुर्वेदिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इतना ही नहीं 100 बेड वाले नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की लंबी चौड़ी फौज एवं लगभग सभी जांच सुविधाएं भी मौजूद हैं। हालांकि आबादी और बढ़ती बीमारी के हिसाब से अभी भी यह पर्याप्त नहीं है। वहीं जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं विस्तार के लिए 100 बेड वाल मल्टी स्पेशियलिटी ब्लॉक तथा मनेठी में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस भी प्रस्तावित है। इधर प्राइवेट स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो जिला बनने के समय जहां इक्का-दुक्का डॉक्टर दिखाई देता था,अब जिले में प्राइवेट अस्पतालों की भी भरमार है। वहीं 200 बेड वाला एक निजी अस्पताल भी उपलब्ध है।
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वर्जन-
सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं पर खासा ध्यान दिया जा रहा है। महज खानपान एवं लाइफ स्टाइल में बदलाव कर बीमारियों से बचा जा सकता है।
-सर्वजीत थापर, डिप्टी सिविल सर्जन