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कारपेंटर कि वकील: लाटरी बंद कराई, सेना प्रमुख को भिजवाया नोटिस

Mon, 04 Apr 2016 12:25 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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कारपेंटर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी जिले के नया गांव निवासी सतबीर सिंह पेशे से कारपेंटर हैं। वे प्रशासन और विभिन्न सरकारों के खिलाफ अब तक करीब 14 याचिकाएं डाल चुके हैं। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश याचिकाओं में खुद पैरवी कर इनपर्सन वकील भी बने हैं।
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गौरतलब है कि गृह मंत्रालय, थल सेना प्रमुख, सांसद और विधायक समेत कुल 104 लोगों को जाट आरक्षण आंदोलन मामले में पार्टी बनाकर सतबीर ने रेवाड़ी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की कोर्ट से नोटिस दिलाया है। उन्होंने राज्य में हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रतिवादी पक्ष से ही 34 हजार करोड़ रुपये की नुकसान भरपाई और संलिप्त पॉलिटीशियंस के खिलाफ चुनाव में रोक की भी मांग की है।

नंबरों वाली लाटरी बंद कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ा है केस
सतबीर ने वर्ष 2002 में नंबरों वाली लॉटरी बंद कराने के लिए गुड़गांव कोर्ट में याचिका लगाई थी। बाद में हुड्डा सरकार ने नंबरों वाली लाटरी बंद कर दी। इसके बाद पंजाब, नागालैंड, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश समेत पांच राज्यों और केंद्र सरकार को पार्टी बनाकर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में 1997-98 के लॉटरी एक्ट के अंतर्गत एक, दो, तीन अंकों वाली लॉटरी को खत्म करने का आदेश दिया।
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पैरा मिलिट्री फोर्स के खिलाफ भी है याचिका
इसके अलावा सतबीर ने पैरा मिलिट्री फोर्स जैसे बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी के खिलाफ भी एक याचिका कोर्ट में डाली है। इसमें तथ्य दिया गया है कि आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले राजनेताओं को पैरा मिलिट्री फोर्स की सुरक्षा क्यों दी जाती है। मामला पटियाला हाउस कोर्ट में विचाराधीन है। यह केस भी वह खुद लड़ रहे हैं।

महिलाओं पर टिप्पणी करने वालों को भी लपेटा
बीते सालों में महिलाओं पर टिप्पणी करने वाले अलग-अलग दलों के पॉलिटीशियंस के खिलाफ भी सतबीर कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर गोरी चमड़ी की टिप्पणी करने वाले हाल में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह हैं। वहीं भाजपा की सांसद हेमा मालिनी पर देखने की चीज वोट देने की नहीं कहने वाले अमर सिंह के अलावा मंत्री स्मृति ईरानी पर ठुमके लगाने वाली की टिप्पणी करने वाले तत्कालीन सांसद संजय निरूपम के खिलाफ भी वे याचिकाएं डाल चुके हैं।

इनकम का अधिकांश हिस्सा कोर्ट कचहरी में होता है खर्च
सतबीर बताते हैं वह फिलहाल दिल्ली में अपने बेटे के यहां रहते हैं। 15 दिन वह कारपेंटरी करते हैं और बचे 15 दिन याचिकाओं के बारे में जानकारी हासिल करने में लगे रहते हैं। कारपेंटरी से होने वाली इनकम का अधिकांश हिस्सा केसबाजी में ही जाता है। इसके अलावा सब्सिडी, आरक्षण, बुढ़ापा पेंशन, आरक्षण, शराब पर रोक के लिए भी रेवाड़ी समेत कई कोर्ट में याचिका लगाकर मामलों में खुद पैरवी कर रहे हैं।
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