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Rewari News: भूकंप का झटका महसूस होते ही घरों से बाहर निकले लोग

Thu, 10 Jul 2025 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। जिले में वीरवार की सुबह 9 बजकर 4 मिनट पर करीब 10 मिनट तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का झटका लगते ही लोग भयभीत हो गए और बचाव के लिए कमरे से बाहर निकल गए लेकिन तबतक भूकंप का झटका खत्म हो चुका था। लोगों में देर तक भय बना रहा।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप का केंद्र झज्जर था। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की 4.4 तीव्रता दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र झज्जर होने के कारण रेवाड़ी में तेज झटका नहीं महसूस किया गया। कई लोगों को तो भूकंप का पता भी नहीं चला। जिसने भूकंप के झटके को महसूस किया वह भयभीत होकर भाग खड़ा हुआ।
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लोगों ने एक-दूसरे को फोन मिलाकर भूकंप के बारे में जानकारी दी। भूकंप को लेकर लोगों में हड़कंप मचा रहा। कहीं फिर न भूकंप आ गए, इसको लेकर लोग देर तक बाहर खड़े रहे।
भाड़वास मार्ग निवासी मुकेश और सोनू ने बताया कि नौ बजे वह चाय पी रहे थे। इसी बीच 9:04 पर भूकंप के झटके महसूस हुए। वह घर से बाहर की ओर दौड़े, हालांकि तब तक भूकंप जा चुका था। हालांकि भूकंप को लेकर देर तक मन में भय बना रहा।
राजेश ने बताया कि भूकंप के तेज झटके महसूस नहीं किए गए लेकिन 10 सेकंड तक महसूस किए गए झटके से लोग भयभीत हो गए। झटका महसूस होते ही लोग बचाव के लिए घर से बाहर निकले। तबतक झटके बंद हो गए थे।
इससे पहले जिले में 23 जून की रात भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस दौरान भूकंप की तीव्रता 2.5 रिक्टर मापी गई थी और भूकंप का केंद्र रेवाड़ी क्षेत्र ही था। आमतौर पर 2.5 या इससे कम तीव्रता वाले भूकंपों से बहुत कम या न के बराबर नुकसान होता है। अक्सर इन्हें सिर्फ कुछ ही लोग महसूस कर पाते हैं।
कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता : भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

क्यों आता है भूकंप
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
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जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती है, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है, लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
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