गांव जैनाबाद के ग्रामीण पिछले एक वर्ष से लगातार बढ़ रही बंदरों की संख्या से खासे परेशान हैं। बंदरों के भय के कारण बच्चों ने छत पर जाना ही छोड़ दिया है। लोगों ने घरों की सीढ़ियों के दरवाजों को भी लंबे समय से नहीं खोला है। बच्चों में दहशत इस कदर हावी है कि बच्चे घरों से बाहर खेलने में भी कतराने लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की गुहार लगाई है।
ग्रामीण शेर सिंह, सज्जन सिंह, सतीश कुमार, करण सिंह, प्रदीप कुमार, पृथ्वी सिंह, सुनील कुमार ने बताया कि गांव में पिछले एक साल से बंदरों का आतंक बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इनकी संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। एक साथ एक झुंड चलते है और घरों में उत्पात मचाते हैं। जब इन्हें भगाने का प्रयास किया जाता है तो ये काटने को दौड़ते हैं। अब धीरे-धीरे ये बंदर हिंसक भी होते जा रहे हैं। इनके आतंक के कारण बच्चे भी घरों में कैद होकर रह गए हैं। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों व महिलाओं को रहती है।
छत पर जाते ही कर देते हैं हमला
पिछले एक माह के दौरान घर में काम कर रही महिला को बंदरों के झुंड ने हमला करके घायल कर दिया था। इसके अलावा घर की छत पर पानी की टंकी साफ कर रहे युवक पर अचानक हमला करने से वह छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुका है। घरों की छतों पर रखी पानी की टंकी से लेकर डिस की छतरी तक को तोड़ देते हैं। इसके अलावा अब यह बंदर इतने ढीठ हो गए हैं कि फ्रीज से भी खाने-पीने के सामान को चोरी कर ले जाते हैं। वहीं बाजार से सामान लेकर आते समय भी अचानक हमला कर थैली तक को छीन ले जाते हैं। ग्रामीणों से प्रशासन से इन बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।