संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले के किसान अगले सीजन में पहली बार मूंगफली का उत्पादन करेंगे। मूंगफली की उन्नत खेती को बढ़ावा देने के लिए बावल स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अबतक 60 किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षित किसान अगले सीजन से मूंगफली की बिजाई करेंगे।
केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मबीर यादव ने बताया कि क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल में पिछले साल से कृषि अनुसंधान परिषद के मूंगफली निदेशालय जूनागढ़ के सहयोग से अनुसंधान और इसकी वैज्ञानिक खेती के प्रोत्साहन के लिए अग्रिम पंक्ति तक प्रदर्शन शुरू किए गए हैं। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में मूंगफली का क्षेत्रफल बढ़ेगा। कार्यक्रम के संयोजक व सहायक वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार डहीनवाल ने किसानों को मूंगफली के उन्नत किस्मों के बारे में बताया। बताया कि मूंगफली एक अति आवश्यक फसल है जो 4.91 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में उगाई जाती है। 2036 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के साथ 10.06 मिलियन टन उत्पादन हैं। गत वर्ष से मूंगफली के अच्छे भाव मिल रहे हैं। किसान मूंगफली की बिजाई 15 जून के बाद कर शुरू कर सकते हैं। बिजाई कार्य 7 जुलाई से पहले पूरा कर लें।
इन किस्मों की करें बिजाई : मूंगफली की बिजाई ड्रिल द्वारा करीब पांच सेंटीमीटर गहरी और पंजाब मूंगफली-1 को 30 गुणा 25 सेंटीमीटर, एमएच-4 को 30 गुणा 15 सेंटीमीटर फासले पर रखकर बोएं। एमएच-2 का 60 किलो बीज प्रति एकड़ डालें। छह किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फासफोरस तथा 10 किलो पोटाश प्रति एकड़ दें। खाद की पूरी मात्रा बिजाई के समय ही 13 किलो सुपरफोस्फोट, 16 किलो म्यूरेट पोटाश प्रति एकड़ दें। दस किलो जिंक सल्फेट भी बिजाई पर ही डाल दें। मूंगफली की एमएच-2 व 4, एम-13, पंजाब मूंगफली नंबर-1 उन्नत किस्में हैं। भुरभरी नरम, बलुई दोमट व उचित जल निकासी वाली भूमि, जिसमें जीवांश पर्याप्त मात्रा में हो उपयुक्त रहती है। वर्षा पर निर्भर फसल के लिए जुलाई से सितंबर तक 50 सेंटीमीटर वर्षा चाहिए।
बढ़ रही मूंगफली की मांग : पिछले सालों में मूंगफली की मांग बढ़ी है। इसकी खेती कर किसान मुनाफा कमा सकते हैं। मूंगफली के तेल का उपयोग रसोई, वनस्पति घी व अन्य सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में किया जाता है। मूंगफली में 25 से 30 फीसद प्रोटीन, पर्याप्त मात्रा में विटामिन ई तथा फास्फोरस, कैल्शियम व लोहा जैसे खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं। मूंगफली की खेती साल भर की जा सकती है। बस ध्यान रखना होता है कि इस फसल की सही ढंग से देखभाल हो, ताकि उसमें कोई रोग न लगे।
मूंगफली में टिक्का रोग, गेरुआ रोग, सड़न रोग, विषाणु रोग, एन्थ्रेक्नोज रोग लगती है। सफेद लट्ट, माहू और दीमक भी मूंगफली को प्रभावित करते हैं। इससे बचने के लिए इन रोगों का उपचार करना चाहिए। मूंगफली में 55 प्रतिशत तक तेल होता है। इसके कई फूड आइटम तैयार होते हैं। गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान में मूंगफली प्रमुखता से होती है।
पैदावार के लिए इन बातों का रखें ध्यान
मूंगफली की पैदावार अधिक करनी हो तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। बुवाई से पहले मूंगफली के बीज का उपचार कर लेना चाहिए ताकि उसके साथ कोई बीमारी न पनप सके। इसके साथ ही फसल को बचाने के लिए कीटों का नियंत्रण जरूरी होता है, जिसके लिए नीम की खली का उपयोग किया जाता है। मूंगफली की फसल को स्वस्थ रखने या बीमारियों से दूर रखने के लिए उर्वरक का बड़ा रोल होता है। इसके लिए फसल में नाइट्रोजन डाला जाता है। एक हेक्टेयर खेत में 15 किलो नाइट्रोजन और 60 किलो फॉस्फोरस डाला जाता है। खाते में 250 ग्राम जिप्सम डालने की सलाह दी जाती है जो कि मूंगफली में तेल की मात्रा को बढ़ाता है। इससे मूंगफली के दाने भी बड़े होते हैं।
कब कौन सी खाद का करें इस्तेमाल
किसान खेत में कंपोस्ट या गोबर खाद डाल सकते हैं। यह खाद बुवाई से 20-25 दिन पहले डालनी चाहिए। इसकी मात्रा प्रति हेक्टेयर खेत में 5 से 10 टन तक हो सकती है। अधिक उपज के लिए खेत में नीम की खली मिला सकते हैं। यह कीटों को फसल से दूर रखती है। नीम की खली पहले ही डाली जाती है और जब खेत की जुताई हो रही हो, तो उसी वक्त मिट्टी में मिलानी चाहिए। एक हेक्टेयर खेत में 400 किलो तक नीम खली डाली जा सकती है। नीम खली से पौधों में दीमक नहीं लगते और इससे नाइट्रोजन की सप्लाई भी हो जाती है। कहा जाता है कि नीम की खली से मूंगफली में 15 प्रतिशत से अधिक उपज ली जा सकती है। मूंगफली का दाना भी बड़ा होता है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है। अगर ठीक से खेती की जाए तो एक हेक्टेयर में 30-30 क्विंटल उपज आराम से ली जा सकती है। सामान्य तौर पर 25-30 क्विंटल मूंगफली की उपज एक हेक्टेयर में मिल ही जाती है। जिस वक्त फसल में फल यानी कि गिरी आने लगे, उस समय खेत में पर्याप्त नहीं होनी चाहिए। इसलिए मूंगफली में सिंचाई का खास ध्यान रखना जरूरी होता है।
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ये हैं मूंगफली की उन्नत किस्में:
मूंगफली की उन्नत किस्मों में गिरनार, जीजी 20, एचएनजी 10, एनएनजी 169, एचएनजी 123, आरजी 425, आरजी 120 से 130, एमए 10 125 से 130, एम 548, 120 से 126, टीजी 37ए 120 से 130, जी 201 110 से 120 शामिल हैं। गुजरात और राजस्थान के किसान इन किस्मों से अच्छी पैदावार प्राप्त करते3 हैं।