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माजरा एम्स निर्माण मामले में हुई पंचायत, ग्रामीण हुए मुखर

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पंचायत में अपनी बात रखते वक्ता। - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। एम्स संघर्ष समिति के आह्वान पर रविवार को मनेठी उप तहसील परिसर में पंचायत बुलाई गई। इसमें माजरा एम्स के लिए जमीन देने वाले किसान मुखर हो गए। उनका कहना था कि दो माह से इस सप्ताह, अगले सप्ताह, दो-चार दिन में जमीन की रजिस्ट्री कराने की बात की गई। इससे सरकार की नीयत में खोट नजर आता है। अगर ऐसा नहीं तो सरकार जल्द रजिस्ट्री कराए।
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इस पंचायत की अध्यक्षता करते हुए उक्त समिति के प्रधान एवं पूर्व सरपंच श्योताज सिंह ने कहा कि माजरा एम्स मामले में लगातार देरी की वजह से यह पंचायत बुलानी पड़ी। एम्स के निर्माण में सरकार जानबूझकर देरी कर रही है और अब लोगों का सब्र टूट रहा है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए साफ कहा कि हमारी मंशा राजनीति करने की नहीं, मगर हमारे साथ भी राजनीति नहीं होनी चाहिए। हम इस मामले को चुनावी फुटबॉल नहीं बनने देंगे। इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि जनता की आवाज नहीं उठा रहे, इस वजह से अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया। जनप्रतिनिधि अगर आवाज उठाते तो इतना समय नहीं लगता। एम्स संघर्ष समिति का एकमात्र लक्ष्य, माजरा एम्स का शिलान्यास कराना है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को भी माजरा एम्स की स्थापना की लड़ाई लड़नी चाहिए। वे इस लड़ाई में आगे क्यों नहीं आ रहे, यह वे ही जानें।
उधर पंचायत में बावल विधायक एवं सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल के उस बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि कुछ लोग अंगुली कटाकर शहीद होना चाहते हैं, पर कड़ी नाराजगी जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि एम्स संघर्ष समिति सहकारिता मंत्री को अपने इस बयान पर माफी मांगने के लिए 9 जुलाई तक का समय देती है। इसके बाद 10 जुलाई से मंत्री के बावल निवास पर धरना शुरू कर दिया जाएगा। उनको काले झंडे भी दिखाए जाएंगे और पुतले भी जलाए जाएंगे। वक्ताओं ने कहा कि राव इंद्रजीत सिंह को समिति के सदस्यों ने धरना समाप्त करते समय बुलाकर बड़ी भूल की। समिति को इसके लिए यहां तक ताने मिले कि पगड़ी तो राव इंद्रजीत को और एनओसी राव नरबीर सिंह दिलवाए। इस महापंचायत में प्रमुख रूप से डा. एचडी यादव, कामरेड राजेंद्र सिंह एडवोकेट, निवर्तमान जिला पार्षद आजाद सिंह नांधा, ओमप्रकाश सेन, कर्नल राजेंद्र सिंह समेत अन्य वक्ताओं ने अपनी बात रखी।
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