संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। उत्तर प्रदेश के झांसी में स्थित मेडिकल कॉलेज में बने एसएनसीयू वार्ड में आग लगने की घटना में 10 नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। आग लगने का कारण ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर बना था। ऐसे में नागरिक अस्पताल रेवाड़ी में बने एसएनसीयू वार्ड, आपातकालीन वार्ड, आईसीयू में ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर का रखरखाव किया जाता है।
चिकित्सकों ने बताया कि ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर में आग लगने का मुख्य कारण अधिक प्रेशर और शॉर्ट सर्किट रहता है। इसके इस्तेमाल पर ध्यान दिया जाता है। साथ ही नियमित रखरखाव की भी व्यवस्था है। जिले के 4 राजकीय अस्पतालों में 40 एमटी ऑक्सीजन के प्लांट कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा सरकारी अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज की क्षमता 6.5 एमटी है। जिले में सरकारी अस्पतालों में इस समय 33 वेंटिलेटर, 392 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, 111 बाईपेप्स, ऑक्सीजन सिलिंडर 435-बी टाइप, ऑक्सीजन सिलिंडर 254-डी टाइप की सुविधा उपलब्ध है।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि ऑक्सीजन गैस आग जलने में सहायक अवश्य है, लेकिन ज्वलनशील गैस नहीं है। इसलिए ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर में आग लगने की संभावना अधिक नहीं रहती। ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर में आग लगने के मुख्य कारण अधिक प्रेशर और शॉर्ट सर्किट होते हैं। सभी ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर में ऑक्सीजन संग्रहीत करने की क्षमता अलग-अलग होती है। ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर से शुद्ध ऑक्सीजन मिलती है। इसको ऑक्सीजन सिलेंडर की तरह रिफिलिंग करने की आवश्यकता नहीं होती है।
वर्जन
नागरिक अस्पताल में आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र और सेफ्टी अलार्म की व्यवस्था की गई है। आग जैसी घटना होने पर भवन से बाहर निकलने के लिए अलग से निकास द्वार भी बनाया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों को हम माह आग लगने पर कैसे बचाव किया जाए उसे लेकर मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है।- डॉ. दीपक वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन रेवाड़ी