रेवाड़ी। दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे पर बढ़ते ट्रैफिक और हादसों के बीच सीमित संसाधनों के सहारे घायलों को राहत पहुंचाने का कार्य लगातार जारी है। हाईवे पर फिलहाल एक एंबुलेंस और एक पेट्रोलिंग गाड़ी है, जोकि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और दुर्घटना प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं। एंबुलेंस करीब 50 किलोमीटर के दायरे को कवर करती है। इस कारण कई बार दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने में अतिरिक्त समय लग जाता है।
हाईवे पर तैनात पेट्रोलिंग टीम हर छह घंटे में गश्त करती है, जोकि पर्याप्त नहीं है। दुर्घटनाओं में घायलों को उपचार के लिए जिले में 35 अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है। इनमें सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पताल भी शामिल हैं ताकि किसी भी स्थिति में घायलों को तुरंत इलाज मिल सके।
अब तक हाईवे पर हुए हादसों में 135 लोगों को विभिन्न अस्पतालों में रेफर किया जा चुका है, जिनमें से 95 घायलों को समय रहते उपचार मिल पाया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी। यह व्यवस्था उन यात्रियों के लिए बड़ी राहत है, जो दूर-दराज से गुजरते समय किसी अनहोनी का शिकार हो जाते हैं।
हाईवे पर दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ने का एक प्रमुख कारण तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग और भारी वाहनों का अनियंत्रित चलना है। कई बार रात के समय दृश्यता कम होने से हादसे की संभावना बढ़ जाती है।
शुरूआती एक घंटे की देरी स्थिति को बना देती है गंभीर
बावल निवासी अजय यादव ने बताया कि कई हादसों में देखने को मिलता है कि घायल व्यक्ति को पास के अस्पताल तक पहुंचाने में शुरूआती एक घंटे की देरी स्थिति को गंभीर बना देती है। एंबुलेंस टीम और पेट्रोलिंग टीम का होना बहुत जरूरी है।
धारूहेड़ा निवासी सुरेंद्र कुमार का कहना है कि हाईवे पर वाहनों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही पेट्रोलिंग गाड़ियों को भी बढ़ाना जरूरी है, ताकि हर सेक्शन पर बराबर निगरानी रखी जा सके।
हाईवे पर एक एंबुलेंस और एक पेट्रोलिंग गाड़ी उपलब्ध है, जो पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और दुर्घटना प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाने की हमारी कोशिश रहती है।
- योगेश, एनएचएआई अधिकारी।