शहर की गलियों को पक्का कराने, पानी निकासी, नालियां, स्कूल भवनों की मरम्मत, आंगनबाड़ी भवन और अन्य विकास कार्यों के लिए आई साढे़ पांच करोड़ की राशि में से प्रशासन अब तक एक करोड़ रुपये ही विकास कार्यों पर खर्च कर पाया है।
अब पंचायत चुनाव की वजह से चुनाव आचार संहिता लग चुकी है और जनवरी माह तक कोई काम नहीं हो पाएगा। फिर प्रशासन बकाया साढ़े चार करोड़ की राशि मार्च माह में कैसे खर्च कर पाएगा। ऐसे में विकास के लिए आई ग्रांट के लैप्स होने की संभावना बनी हुई है क्योंकि पिछले वर्ष भी प्रशासन की अनदेखी से विकास के लिए आई ग्रांट में से 56 लाख की धनराशि लैप्स हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार डिस्ट्रिक्ट डवलपमेंट एंड मॉनीटरिंग कमेटी की सालाना होने वाली मीटिंग में जिले के विकास कार्यों की प्लानिंग की जाती है। विकास के लिए मिली ग्रांट के लिए भी योजना तैयार की जाती है। साढ़े पांच करोड़ रुपये के प्लान में लगभग नौ महीने का वक्त गुजरने को है लेकिन एक करोड़ रुपये ही खर्च हो पाएंगे हैं। साढ़े चार करोड़ रुपये के कार्य कराने के लिए सिर्फ फरवरी और मार्च का महीना ही बाकी रहेगा। ऐसे में जिले के विकास और के लिए आए पैसे के लैप्स होने का संकट बन गया है। पिछले वर्ष भी प्रशासन की अनदेखी से विकास के लिए आई करीब 56 लाख की राशि लैप्स हो चुकी है।
पांच करोड़ 66 लाख की विकास योजना
चालू वित्तीय वर्ष 2015-2016 के लिए बनाए गए प्लान में जिले के लिए पांच करोड़ 66 लाख रुपये की विकास योजना तैयार की गई। इसमें 3 करोड़ 40 लाख रुपये सामान्य वर्ग और 2 करोड़ 46 लाख एससी वर्ग के क्षेत्रों के लिए शामिल है। वहीं दिसंबर तक हमारे जिले में इस राशि में एक करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं। पंचायत चुनाव की वजह से लगी आचार संहिता जनवरी के अंतिम सप्ताह तक रहेगी। फिर प्रशासन विकास के लिए मिली ग्रांट की बकाया राशि को एक माह में कैसे खर्च कर पाएगा।
पिछले वित्तीय वर्ष में ऐसे लैप्स हुई राशि
सरकार की ओर से इस कमेटी की ओर से तैयार सालाना बजट दो स्तर पर भेजा जाता है। प्लानिंग भी इसी प्रकार से होती है। पहली सामान्य वर्ग और दूसरी एससी वर्ग। जिन गांव या कॉलोनी में 40 फीसदी या इससे अधिक लोग एससी के रहते हैं, उसे एससी क्षेत्र या गांव का दर्जा मिल जाता है। 2014-2015 में सामान्य वर्ग के लिए दो करोड़ 12 लाख और एससी वर्ग के लिए एक करोड़ 41 लाख रुपये की योजना तैयार हुई, लेकिन सामान्य वर्ग के 42 लाख और एससी वर्ग के क्षेत्र के 14 लाख अधिकारी खर्च ही नहीं कर पाए और यह कुल 56 लाख रुपये की राशि लैप्स हो गई।
सत्र के शुरू में बनती है प्लानिंग
डिस्ट्रिक्ट डवलपमेंट एंड मॉनिटरिंग कमेटी की वित्त वर्ष के शुरू में बैठक होती है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक शामिल होते हैं। बीडीपीओ भी ग्राम सभाओं की ओर से आने वाली प्लानिंग को इसमें शामिल कराते हैं। विधायक से लेकर एमपी तक भी अपने स्तर पर इस योजना में कुछ काम देते हैं। यहां से पूरी रिपोर्ट तैयार होकर सरकार के पास जाती है, जिसमें ऑन लाइन पैसा जिले में भेज दिया जाता है।
वर्जन...
मैंने कुछ समय पहले ही ज्वाइन किया है। अभी चुनाव होने हैं। लेकिन नई चुनी जाने वाली ग्राम पंचायतों के सहयोग से वित्तीय वर्ष के आखिर तक सभी काम पूरे हो जाएं।
डॉ प्रियंका सोनी, एडीसी