संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीक्यूएम) की ओर से रेवाड़ी समेत एनसीआर क्षेत्र में लागू किए गए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) को लेकर उपायुक्त राहुल हुड्डा ने शुक्रवार को अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड, शहरी निकायों, एसएसआईआईडीसी समेत अन्य विभागों के अधिकारियों को वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया। कहा कि सिर्फ खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। सभी अधिकारी वायु गुणवत्ता के लिए जमीनी स्तर पर मिलकर काम करें।
डीसी ने कहा कि केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने रेवाड़ी समेत अन्य एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नया आदेश जारी किया है। सभी एजेंसी, विभागों व संबंधित विभागाध्यक्षों को सीएक्यूएम की ओर से जो भी आदेश जारी किए गए हैं और जिला प्रशासन की ओर से जो भी जिम्मेदारी सौंपी गई है उनका सभी पालन करें। प्रदूषण नियंत्रण के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही सहन नहीं की जाएगी।
डीसी ने नगर परिषद, नगर पालिका, एसएसआईआईडीसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अनय संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे जिले में कंस्ट्रक्शन साइट व औद्योगिक इकाइयों की नियमित रूप से निरीक्षण करें। ग्रैप के नियमों की अनदेखी, अनियमितताएं व कोताही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करें और उनके चालान भी कांटे। जिस क्षेत्र में कंस्ट्रक्शन प्रतिबंधित है, उस क्षेत्र में निर्माण न होने दें। उन्होंने संबंधित एसडीएम को कंस्ट्रक्शन साइट, औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने और निर्माणाधीन साइट पर एंटी वाटर गन व स्प्रिंकलर लगवाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने एनएचएआई के अधिकारियों को सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के पानी का छिड़काव कराने और अवैध कटों को बंद कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा औद्योगिक इकाइयां निर्माण कराते समय वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम का प्रयोग करें।
बैठक में एडीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल, एसडीएम रेवाड़ी होशियार सिंह, एसडीएम बावल डॉ. जितेंद्र सिंह, एसडीएम कोसली जयप्रकाश, डीएमसी उदय सिंह सहित प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड, शहरी निकायों, एचएसआईआईडीसी व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
कितना एक्यूआई खराब और गंभीर
पहला चरण : खराब (एक्यूआई 201 से 300 तक)
दूसरा चरण : बेहद खराब (एक्यूआई 301 से 400 तक)
तीसरा चरण : गंभीर (एक्यूआई 401 से 450 तक)
चौथा चरण : इमरजेंसी (एक्यूआई 450 से अधिक)