रेवाड़ी। पांच वर्षों बाद डेंगू के मामलों में गिरावट से स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है। इस वर्ष अबतक डेंगू का एक भी मामला नहीं मिला है। डेंगू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को जागरूक किया जाता है। हर वर्ष 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है जिसके तहत लोगों को डेंगू से बचाव के लिए जागरूक किया जाता है। इस बार भी स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता कार्यक्रम की योजना बनाई है।
जिले डेंगू के मामलों में कमी आई है। वर्ष 2020 के बाद पहली बार वर्ष 2025 में जिले में डेंगू के 295 मामले सामने आए जो पिछले पांच वर्षों में सबसे कम रहे। इस वर्ष अब तक जिले में डेंगू का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
नागरिक अस्पताल में जनवरी से अब तक 831 लोगों के सैंपल लिए जा चुके हैं और सभी रिपोर्ट नेगेटिव आई हैं। स्वास्थ्य विभाग इसे जागरूकता अभियान और समय रहते किए गए बचाव उपायों का सकारात्मक परिणाम मान रहा है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में जिले में केवल 39 डेंगू केस दर्ज किए गए थे। इसके बाद वर्ष 2021 में 306, वर्ष 2022 में 324, वर्ष 2023 में 403 और वर्ष 2024 में 412 मामले सामने आए। हालांकि वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 295 पर पहुंच गई, जिससे विभाग को राहत मिली है।
जिला मलेरिया नोडल अधिकारी डॉ. जोगेंद्र तंवर ने बताया कि डेंगू की रोकथाम के लिए विभाग लगातार गांवों और शहरों में जागरूकता अभियान चला रहा है। घर-घर जाकर लोगों को पानी जमा नहीं होने देने, साफ-सफाई रखने और मच्छरों से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। इसके अलावा सोर्स रिडक्शन अभियान, फीवर सर्वे और संदिग्ध मरीजों की जांच भी नियमित रूप से की जा रही है। संवाद
अगस्त से नवंबर तक रहता है ज्यादा खतरा
डॉ. जोगेंद्र तंवर ने बताया कि अगस्त से नवंबर तक डेंगू का पीक सीजन माना जाता है। बरसात के बाद जलभराव की स्थिति बनने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ता है। उन्होंने कहा कि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर दिन के समय काटता है, इसलिए लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि डेंगू के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द तथा लाल चकत्ते शामिल हैं। कुछ मरीजों में मसूड़ों से खून आना और पेट दर्द की शिकायत भी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल जाकर जांच करवानी चाहिए।
वर्जन:
डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग गांवों और शहरों में जागरूकता अभियान चला रहा है। घर-घर जाकर लोगों को पानी जमा नहीं होने देने, साफ-सफाई रखने और मच्छरों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है। जागरूकता से ही डेंगू पर नियंत्रण पाया जा सकता है।- डॉ. जोगेंद्र तंवर, डिप्टी सिविल सर्जन एवं नोडल अधिकारी, मलेरिया एवं डेंगू।