रेवाड़ी। ठंड में जुकाम, खांसी के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल में नाक से रक्त आने, एलर्जी के कारण नाक से पानी आने के मरीज भी आ रहे है। इन रोगों के रोजाना 100 से 120 मरीज अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषण और ठंड के कारण दिक्कत ज्यादा बढ़ रही है, ऐसे में मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलें और ठंड से बचाव के कपड़े पहनें। विशेषज्ञ डॉ. अशोक रंगा का कहना है कि सर्दियों में शुष्क हवा, इनडोर हीटिंग और संक्रमण के कारण नाक-कान-गले के मरीजों में वृद्धि हुई है।
इसमें नाक से खून आने की समस्या प्रमुख है। शुष्क मौसम के कारण नाक की झिल्लियां सूख जाती हैं, जिससे रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं। ज्यादा ठंड और गर्मी में ये समस्या रहती है। घर के अंदर की गर्म हवा और बाहर की ठंड हवा का मिश्रण नाक की झिल्लियों को सूखा देता है। इससे पपड़ी बनती है और खुजलाने या फूंकने से रक्तस्राव होता है।
ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम, साइनस और श्वसन संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं, जो नाक की परत को कमजोर करते हैं। नाक में उंगली डालना, बहुत तेज या जोर से नाक साफ करना, या चोट लगना भी खून आने का कारण हो सकता है।
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सावधानी और बचाव के उपाय:
ठंडे पानी से परहेज करें और गर्म पेय पदार्थ का सेवन बढ़ाएं। नाक और गले की सफाई का ध्यान रखें। ठंड में ज्यादा समय बाहर रहने से बचें। गले में लगातार खराश, तेज बुखार या कान में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने के लिए प्रेरित करें। हाथ धोने और मास्क पहनने जैसी व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करें।
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वर्जन:
ठंड लगातार बढ़ रही है और प्रदूषण भी ऐसे में संक्रमण का ज्यादा खतरा बढ़ रहा है। अगर घर से बाहर निकल रहे हैं तो मास्क जरूर लगाएं। इसके अलावा ठंड से बचाव के कपड़े डालें। डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें। - डॉ. अशोक रंगा, विशेषज्ञ, ईएनटी, नागरिक अस्पताल