अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित की
एनजीटी ने कहा कि अब यह मामला केवल फाइलों में अटका हुआ औपचारिक विवाद नहीं रह सकता। केंद्र, दिल्ली और हरियाणा सरकार को स्पष्ट करना होगा कि साहबी नदी के पुनरुद्धार की कार्ययोजना क्या है? नजफगढ़ झील और नदी के बीच जल प्रवाह की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय महत्व की नदी घोषित करेगी? अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित की गई है, जिसमें सभी संबंधित विभागों को प्रमाणिक और विस्तृत जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
एचएसवीपी की रिपोर्ट पर उठे सवाल
एचएसवीपी ने दावा किया कि धारूहेड़ा में स्थित उनके 5 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। लेकिन याचिकाकर्ता प्रकाश यादव ने बताया कि इन प्लांट्स का सीटीओ 1 अक्तूबर 2023 से समाप्त हो चुका है, फिर भी इन्हें संचालित किया जा रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्टों में कई जरूरी पैरामीटर्स शामिल नहीं हैं और परीक्षण मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से नहीं कराया गया। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि जब संचालन की अनुमति ही समाप्त हो चुकी है, तो रिपोर्टों को वैध कैसे माना जा सकता है। यह केवल कागजी खानापूर्ति है।
पर्यावरणविदों का मत-पहले नदी को उसका जीवन लौटाओ
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि साहबी नदी को फिर नदी बनाना केवल नाम बदलने की बात नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिस्थितिक पुनर्जागरण का प्रयास है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदूषण स्रोतों की पहचान कर तत्काल रोका जाए, सभी एसटीपी को वैध अनुमति के साथ संचालित किया जाए। नदी तटों पर पौधरोपण और जल संचयन कार्य हो तथा स्थानीय समुदायों को पुनर्जीवन अभियान से जोड़ा जाए।
रेवाड़ी के मसानी बैराज से निकलती है साहबी नदी
साहबी नदी रेवाड़ी के मसानी बैराज से निकलकर दिल्ली के नजफगढ़ झील क्षेत्र में पहुंचती है। पहले यह नदी प्राकृतिक रूप से यमुना से जुड़ी थी, लेकिन समय के साथ इसमें औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज का प्रवाह शुरू हो गया। आज स्थिति यह है कि हरियाणा के कई एसटीपी और औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी सीधे इस नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे यह भूजल और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा बन गई है।