रेवाड़ी। जिले में महिलाओं और पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति में कुछ चिंताजनक बदलाव सामने आए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) के अनुसार पिछले सर्वेक्षण की तुलना में महिलाओं में अधिक वजन और मोटापे का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है। महिलाओं में अधिक वजन और मोटापे का प्रतिशत एनएफएचएस-5 में 28.3 प्रतिशत था, जो एनएफएचएस-6 में बढ़कर 36 प्रतिशत हो गया।
पांच-सात साल के अंतराल में इसमें 7.7 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज हुई। दूसरी ओर कम बीएमआई वाली महिलाओं का प्रतिशत 18 से घटकर 11.7 प्रतिशत रह गया। इसका मतलब है कि कम वजन की समस्या में कमी आई है, लेकिन इसके साथ अधिक वजन और मोटापे की समस्या बढ़ी है।
वहीं, महिला और पुरुष दोनों में हाई ब्लड शुगर का स्तर भी बढ़ा है। महिलाओं में हाई शुगर का प्रतिशत 8.2 से बढ़कर 16.5 और पुरुषों में 10.9 से बढ़कर 18.7 प्रतिशत हो गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बढ़ता मोटापा और ब्लड शुगर भविष्य में गैर-संचारी रोगों के बढ़ते खतरे का संकेत माना जा सकता है।
हाई बीपी में आई कमी
जहां मोटापा और ब्लड शुगर बढ़ा है, वहीं हाई ब्लड प्रेशर के आंकड़ों में सुधार हुआ है। महिलाओं में हाई बीपी या दवा लेने वाली महिलाओं का प्रतिशत 24.1 से घटकर 16.8 प्रतिशत रह गया। पुरुषों में भी यह आंकड़ा 26.5 से घटकर 22.8 प्रतिशत हो गया। महिलाओं में 7.3 और पुरुषों में 3.7 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज हुई।
महिलाओं की आर्थिक और डिजिटल पहुंच में सुधार
एनएफएचएस-6 में महिलाओं की आर्थिक और डिजिटल पहुंच में भी सकारात्मक बदलाव सामने आया है। अपना बैंक या सेविंग खाता खुद इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 80.8 से बढ़कर 87.1 हो गया। इसी तरह अपना मोबाइल फोन खुद इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 55.9 से बढ़कर 71.6 पहुंच गया। 15 से 24 वर्ष की महिलाओं में हाइजीनिक पीरियड प्रोटेक्शन का इस्तेमाल भी 94.8 से बढ़कर 95.5 प्रतिशत हुआ।
तंबाकू और शराब सेवन में कमी
तंबाकू और शराब के सेवन के आंकड़ों में भी सुधार दिखा है। महिलाओं में तंबाकू सेवन 4.4 से घटकर 3.8 प्रतिशत और पुरुषों में 33.5 से घटकर 28.5 प्रतिशत रह गया। पुरुषों में शराब सेवन 19.1 से घटकर 16.5 प्रतिशत हुआ। महिलाओं में शराब सेवन 0.3 प्रतिशत पर ही बना रहा। आंकड़े बताते हैं कि जहां कुछ स्वास्थ्य जोखिम घटे हैं, वहीं बढ़ता मोटापा और ब्लड शुगर जिले के लिए नई स्वास्थ्य चुनौती बनकर सामने आए हैं।
क्या है एनएफएचएस
डॉ. ज्ञान मिश्रा ने बताया कि एनएफएचएस यानी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे भारत में परिवारों और लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति का व्यापक सर्वेक्षण है। इसमें पोषण, बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य, मातृ स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, बीएमआई, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, टीकाकरण, नशे के सेवन और महिलाओं के सशक्तीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण संकेतकों की जानकारी जुटाई जाती है। यह सर्वेक्षण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत किया जाता है। इसके आंकड़ों से देश, राज्य और जिला स्तर पर स्वास्थ्य की स्थिति और समय के साथ हुए बदलावों को समझने में मदद मिलती है।
संकेतक एनएफएचएस-5एनएफएचएस-6बदलाव (महिलाएं)
कम बीएमआई 18.0 - -11.7 - - 6.3- घटा
अधिक वजन/मोटापा 28.3 - 36.0 7.7 बढ़ा
हाई शुगर 8.2 -16.5 8.3 बढ़ा
हाई बीपी 24.1 - 16.8 7.3 घटा
अपना बैंक खाता 80.8 - 87.1 - 6.3 बढ़ा
अपना मोबाइल 55.9 -71.6 -15.7 बढ़ा
हाइजीनिक पीरियड प्रोटेक्शन 94.8 -95.5 0.7 घटा
तंबाकू सेवन 4.4 -3.8 -0.6 घटा
शराब सेवन 0.3 0.3 -0
संकेतक- एनएफएचएस-5- एनएफएचएस-6बदलाव (पुरुष)
हाई शुगर 10.9 18.7 7.8 बढ़ा
हाई बीपी/दवा 26.5 -22.8 3.7 घटा
तंबाकू सेवन 33.5 -28.5 5.0 घटा
शराब सेवन 19.1 -16.5 2.6 घटा