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क्यूकर पड़े नाम..ये म्हारे गाम

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गांव नंगली परसापुर का ऐतिहासीक मंदिर। - फोटो : Rewari
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बावल से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित गांव नंगली परसापुर को करीब डेढ़ सौ साल पूर्व महेंद्रगढ़ जिले के गांव तिगरा निवासी परसराम द्वारा बसाया गया था। यादव बाहुल्य गांव की आबादी करीब दो हजार है। करीब 800 मतदाता है, जिनमें 370 से अधिक महिला मतदाता है। क्षेत्र में महिलाओं की शिक्षा के मामले अग्रणीय रहने वाले गांव में दो महिला चिकित्सक है तथा खेेल व अन्य क्षेत्र में भी गांव की बेटियों ने बेहतर मुकाम हासिल किया है। हालांकि गांव से शहर के लिए सरकारी परिवहन सुविधा का लंबे समय से अभाव है, जिसके कारण ग्रामीणों को प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। पूर्णरूप से ओडीएफ गांव प्रशासन की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है। सुविधाओं के नाम पर प्राइमरी स्कूल, पशु अस्पताल व कॉ-ओपरेटिव बैंक है। इसके अलावा गांव में एक आईपीएस, एक पीएचडी व 25 से अधिक युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं।
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गांव के सभी ग्रामीण आपस में मिलजुल कर रहते हैं। सामाजिक, धार्मिक व विकास कार्यों में आपस में सहयोग करते है, जिसके कारण विकास के मामले में अन्य गांवों की तुलना में सबसे आगे है। इसके अलावा बालिका शिक्षा के मामले में भी काफी आगे है। गांव की बेटियां शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में काफी नाम कमा रही है।
-रेखा यादव, सरपंच
गांव के युवाओं में शिक्षा को लेकर काफी उत्साह है। शिक्षा, चिकित्सा, खेल व सेना में भर्ती होकर गांव के युवा देश की सेवा कर रहे हैं। इसके साथ ही गांव से शहर के लिए परिवहन सुविधा का अभाव होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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-मास्टर अमर सिंह
गांव की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में बेटों से आगे है। चिकित्सा, शिक्षा व खेलों में बेटियों ने अपना परचम फहराया है। इसके अलावा सभी ग्रामीण आपस में मिलजुल कर रहे हैं। लेकिन बेटियों के लिए अलग से खेल मैदान का अभाव है।
भीम सिंह
गांव में उच्च विद्यालय का अभाव है। कई बार संबंधित अधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बच्चों को दूसरे गांवों या फिर शहर में जाना पड़ता है।
-राजीव कुमार
मेरा गांव ओडीएफ गांवों की श्रेणी आता है। सभी ग्रामीण आपस में मिलजुल कर रहते हैं। ग्रामीणों के आपसी भाईचारे का ही परिणाम है कि विकास के मामले में भी बावल खंड में गांव का नाम काफी आगे है।
-काशीराम
गांव में रोडवेज की परिवहन सुविधा का अभाव है। ग्रामीणों द्वारा कई बार इस रूट पर रोडवेज की बस चलाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। रोडवेज की बसों के अभाव में ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
-मास्टर सुरेंद्र
गांव में उच्च विद्यालय, लड़कियों के लिए खेल मैदान व रोडवेज की बस सुविधा का अभाव है। हालांकि गांव के लड़के व लड़कियों ने शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में अपनी लग्न व मेहनत से उच्च मुकाम प्राप्त किया है।
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-देवेंद्र कुमार
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