रेवाड़ी। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने और दक्षिण हरियाणा की कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए प्रस्तावित नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर परियोजना को अगले सप्ताह केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इस संबंध में केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में नई दिल्ली में बैठक होने की बात सामने आई है। करीब 32 हजार करोड़ रुपये की प्रस्तावित परियोजना से दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के बीच तेज सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित कॉरिडोर के पहले चरण में दिल्ली से गुरुग्राम, धारूहेड़ा, बावल और बहरोड़ तक कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। दूसरे चरण में इसे राजस्थान के अलवर तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।
धारूहेड़ा और बावल में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां हैं, जहां दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों कर्मचारी रोजाना आते-जाते हैं। कॉरिडोर बनने से सड़क पर निर्भरता कम होने और यात्रा समय बचने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह इस परियोजना को आगे बढ़ाने की मांग उठाते रहे हैं। रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठा चुके हैं और मुख्यमंत्री से पत्राचार कर चुके हैं।
दिल्ली-बावल-बहरोड़ रूट के अलावा दिल्ली-पानीपत-करनाल और गुरुग्राम-फरीदाबाद-जेवर एयरपोर्ट कॉरिडोर भी प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और शहरों के बीच आवागमन आसान करना है।
हालांकि, परियोजनाओं की अंतिम मंजूरी, निर्माण और संचालन की समयसीमा सरकारी स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर को मिलने वाली संभावित मंजूरी पर दक्षिण हरियाणा के लोगों और औद्योगिक क्षेत्र की नजरें टिकी हैं।