फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महकमों ने दबाए नप के पौने तीन करोड़

Sun, 23 Oct 2016 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
सरकारी विभाग
विज्ञापन
एक तरफ सरकार आम आदमी से समय पर विभिन्न बिल जमा करने की अपील करती है वहीं दूसरी तरफ उसके महकमे ही बिल जमा करने में आनाकानी करते हैं। वह भी कुछ एक महीने का बिल नहीं, बल्कि सालों के। नगर परिषद की बात करें तो इसकी हाउस टैक्स के रूप में आनेवाली करोड़ों रुपये की इनकम चार साल से 40 सरकारी महकमों के पास दबी हुई है। शहरी क्षेत्र के इन महकमों की बात करें तो नगर परिषद की झोली में हाउस टैक्स के रूप में गिरने वाले 2.80 करोड़ रुपये की राशि दबाई हुई है। इन महकमों में लघु सचिवालय, बिजली निगम, पब्लिक हेल्थ जैसे बड़े-बड़े विभाग हैं। एक विभाग तो ऐसा है जिसकी अकेले का अनपेड हाउस टैक्स कुल राशि के आधे से भी ज्यादा है। ऐसे में ये विभाग ही सरकार की राजस्व संबंधी योजनाओं को पलीता लगाते दिखते हैं।
विज्ञापन

-------------
बिजली निगम के पास 1.5 करोड़ बकाया
नगर परिषद की चार सालों की कुल बकाया राशि 2.80 करोड़ रुपये के करीब है। खास बात यह है कि केवल बिजली निगम ने ही इसका आधा झटका नप को दे रखा है। निगम की कुल बकाया राशि करीब 1.5 करोड़ रुपये बैठ रही है। इनमें दक्षिण हरियाणा विद्युत निगम-1 की बकाया राशि 1.24 करोड़ रुपये है जबकि हरियाणा विद्युत निगम-2 का चार साल से हाउस टैक्स का शेष भुगतान 24 लाख के करीब है। वहीं बिजली निगम को भी नगर परिषद से बिजली के बिल के रूप में एक मोटी रकम लेनी है, जो कि सालों से नहीं जमा की गई है।
---------
इन विभागों के हैं बकाया (लगभग)
डीएचबीवीएन: 1.50 करोड़, रोडवेज बस स्टैंड और वर्कशॉप: 15 लाख, सेंट्रल को-आपरेटिव बैंक सोसायटी: 60 हजार, हरियाणा टूरिज्म कांपलेक्स: 23 लाख, जिला सचिवालय: सवा 11 लाख, उपायुक्त निवास: 1 लाख, हरियाणा स्टेट वेयर हाउस: 95 हजार, पब्लिक हेल्थ निवास: 70 हजार, कार्यकारी अभियंता पब्लिक हेल्थ मॉडल टाउन: 1.10 लाख,  एसडीओ एग्रीकल्चर: 2.68 लाख, एडीओ पब्लिक हेल्थ: 27 लाख, बीडीपीओ, 1.32 लाख, एक्सईएन पीडब्लूडी रेस्ट हाउस: 5.26 लाख, पीडब्लूडी रेस्ट हाउस: 3.47 लाख, सब जज कोर्ट कांपलेक्स पुराना: 5.58 लाख, मार्केट कमेटी नई अनाज मंडी: 2 लाख, सैनिक परिवार भवन: 3.29 लाख, हरियाणा स्टेट वेयर हाउस अनाज मंडी: 3.81 लाख, रेडक्रास आफिस: 3 लाख, टेलीफोन एक्सचेंज सर्कुलर रोड: 5.50 लाख, ईओ पीडब्लूडी बीएंडआर आफिस: 5.50 लाख, पीडब्लूडी ऑफिस: 5.39 लाख, जिला प्रबंधक एचडब्ल्यूसी रेलवे गोदाम: 9.75 लाख
विज्ञापन

--------
निजी भवनों का सर्वे ही पूरा नहीं
नप ने सरकारी महकमों के बकायादारों की लिस्ट तो तैयार कर ली है लेकिन हैरत की बात यह है कि निजी भवनों के टैक्स के बारे में नप के पास ऐसी कोई लिस्ट तैयार नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि निजी भवनों के लिए एक निजी फर्म से सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे का काम पिछले कई सालों से पूरा ही नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार सर्वे करने वाली कुछ कंपनी बदली भी जा चुकी हैं। यही नहीं इनका भुगतान भी किया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर निजी भवनों का सर्वे कब तक पूरा होगा। विभाग की ही मानें तो निजी घरों के हाउस टैक्स रेगुलर होने की स्थिति में 4 करोड़ से ज्यादा की आमदनी की उम्मीद है। गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार ने 1 अप्रैल 2010 में हाउस टैक्स दोबारा शुरू किये थे।  
--------------
40 सरकारी विभागों के हाउस टैक्स 2012 के बाद से नहीं भरे हैं। हाउस टैक्स न देने वाले विभागों की लिस्ट तैयार कर ली गई है। इन सभी को नोटिस थमाए जाएंगे।
विज्ञापन

- मनोज यादव, ईओ, नगर परिषद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें