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नप के खाते में आए 34 करोड़, शहर का विकास जीरो.

Sun, 11 Sep 2016 12:57 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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 भ्रष्टाचार के साए और डर्टी पॉलिटिक्स में शहर का विकास बुरी तरह फंस गया है। आलम यह है कि नगर परिषद के खाते में सीएम की घोषणा, सांसद निधि व विभिन्न योजनाओं के तहत पिछले दो सालों में 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि शहर के विकास के लिए आई है।
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बावजूद इसके नगर परिषदीय क्षेत्र में डेवलेपमेंट के नाम पर एक ईंट भी नहीं लगाई गई है। ऐसे में पार्टियों के बीच की राजनीति का खामियाजा सीधे तौर पर शहरवासियों को उठाना पड़ रहा है। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि जब महज डेढ़ साल ही और बचे हैं तो इतने कम समय में शहर के विकास का कितना खाका खींचा जा सकेगा।

किस-किस मद में आई है विकास के लिए रकम
सीएम की घोषणा, सांसद निधि, डी प्लान, आईएचएसबीपी प्लान, अमृत योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना के अलावा सांसद और मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने सांसद निधि कोष से शहर की बाजारों और सड़कों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए रकम भेज चुके हैं। बावजूद इसके शहर की सड़कें तीसरी आंख से दूर हैं। अगर ये सभी योजनाएं सिरे चढ़तीं तो निश्चित ही इन दो सालों में शहर का विकास दिखाई देता।
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किसी विकास कार्य का ब्लू प्रिंट भी नहीं तैयार
भ्रष्टाचार और राजनीतिक उठा पटक के चलते नगर परिषद रेवाड़ी का क्या हाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में विकास के लिए 5 करोड़ रुपये के टेंडर विभिन्न मदों में छोड़े जा चुके हैं। बावजूद इसके काम शुरू होने की अगली प्रोसेस शुरू ही नहीं हुई है। नवंबर 2014 से अगस्त 2016 के बीच करीब 34 करोड़ रुपये विभिन्न मदों से आए हैं। लेकिन काम धरातल पर होने तो दूर अभी तक किसी काम का ब्लू प्रिंट भी नहीं बना है।

भाजपा सरकार आने के बाद लगा ब्रेक
राज्य में भाजपा सरकार आने के साथ ही रेवाड़ी विधानसभा में भाजपा की फतह 2014 में हुई थी। इस बीच भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष सतीश खोला ने 2013 और 2014 में हुए विकास कार्यों में नप की वर्तमान प्रधान और कांग्रेस नेत्री शकुंतला भांडोरिया और तत्कालीन अधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की शिकायत दी। इसके बाद एक-एक कर जिला प्रशासन और सीएम के आदेश पर विजिलेंस टीम की कई जांच हुईं और इस बीच रेवाड़ी में विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया।

महज बचे डेढ़ साल अब क्या होगा काम
नगर परिषद का चुनाव हुए साढ़े तीन साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। बावजूद नप के खाते में विकास के नाम पर कुछ खास दर्ज नहीं हो सका है। हाल ही में भाजपा व्यापार मंडल के प्रदेश संयोजक इस बाबत नगर परिषद के सभी पार्षदों से भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी प्रधान को कुर्सी से हटाने और बचे डेढ़ सालों में शहर के विकास के लिए जुटने का आह्वान कर चुके हैं।
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नगर परिषद में कार्यभार संभालने के बाद शहर का विकास प्राथमिकता पर है। शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के साथ ही शहर के कायाकल्प के प्रयास शुरू किए जा चुके हैं। जल्द ही बैठक कर अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
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मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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