रेवाड़ी। एक बार फिर से आए भूकंप के झटके ने लोगों को हिला दिया है। हाई रिस्क जोन में शामिल रेवाड़ी के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। भले ही भूकंप से रेवाड़ी में कोई क्षति नहीं पहुंची हो, लेकिन रेवाड़ी में पांच हजार से ज्यादा मकान ऐसे हैं जो जर्जर हालत में है। इस जर्जर मकान में रहने वाले लोगों के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा खतरा है। जिले में इतनी बड़ी संख्या में जर्जर मकान होने के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई गंभीरता नहीं दिखाई। रेवाड़ी हाई रिस्क की श्रेणी-4 में आता है।
कंपन होती ही हो जाएं सतर्क
केएलपी कॉलेज के प्रिंसिपल एवं ज्योग्राफी विभाग के अध्यक्ष शमेशर सिंह यादव का कहना है कि यूरेनियम प्लेट और इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेटों के टकराने से भूकंप आते हैं। भूकंप आने पर तीन तरंगे या यूं कहें कि कंपन पैदा होती है। पहली पी-तरंग, दूसरी एस और तीसरी एल है। ऐसे में सबसे पहले पी-तरंग आती है, जिससे सबसे पहले धरती में कंपन पैदा होती है। ऐसे में लोगों को कंपन के साथ ही सावधान हो जाना चाहिए। एस और एल खतरनाक होती है, जिससे नुकसान होता है।
भूकंप के वक्त क्या करें
विशेषज्ञों के अनुसार भूकंप के वक्त जितना हो सके, उतनी जल्द खुले मैदान में आ जाना चाहिए। यदि ऊंची बिल्डिंग में रहते हैं और नीचे नहीं आ सकते तो तत्काल कोने में खड़ा होना चाहिए। हो सके तो घर में रखी टेबल आदि के नीचे कोने में बैठ जाना चाहिए। क्योंकि ऐसी बिल्डिंगों में लेंटर होने से ज्यादा नुकसान नहीं होता। वहां कुछ प्लास्टर आदि झड़ सकता है, जिससे बचा जा सकता है। लिफ्ट का प्रयोग न करें, वह जाम हो सकती है।
भूकंप के बाद क्या न करें
भूकंप आने के बाद भी सावधान रहें। भूकंप के दौरान सिलेंडर लीक होने की संभावना रहती है। इसलिए भूकंप आते ही लाइट बंद कर दें और काफी देर बाद ही उसे चालू करें। नहीं तो सिलेंडर लीक होने या जहरीली गैस से आग लग सकती है।
यह रखें ध्यान
मकान यदि गाडर या पट्टी के हैं तो उन पर लेंटर डलवा लें। बाजारों में होर्डिंग आदि बड़े नहीं होने चाहिए। मकान की दीवारों पर भारी वस्तु न टांगें। मकान बनाते वक्त ही छज्जा आदि बनवाएं। बाद में बनवाया छज्जा भूकंप से गिर सकता है।
सरकार देती है पैसा
जिनके मकान जर्जर हैं, वह बीपीएल परिवार परिवार इंदिरा आवास योजना के तहत सरकार से पैसा लेकर मकान बना सकते हैं। करीब 91 हजार रुपये की राशि इस योजना में मिलती है।
वर्जन...
शहर में जर्जर मकानों के मालिकों को नोटिस दिए गए थे। यदि किसी ने उन्हें नहीं गिराया तो दोबारा देखा जाएगा।
विजयपाल यादव, ईओ, नगर परिषद
गांवों में सरकारी जर्जर बिल्डिंगों को समय-समय पर संबंधित विभाग गिरा देते हैं। इसके अलावा पुरानी हवेलियों या जर्जर मकानों को पंचायत प्रस्ताव पास कर कार्रवाई कर सकती है।
एसी कौशिक, डीडीपीओ