फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऑन लाइन होगी मॉनिटरिंग व 10 बीओडी का ट्रीटीड पानी ही साबी में डाल सकेंगे

विज्ञापन
रणधीर सिंह कापड़ीवास विधायक रेवाड़ी - फोटो : Rewari
विज्ञापन
मानव संसाधन एवं सांख्यिकी मंत्रालय की टीम की ओर से साबी नदी में पानी भरने के लिए जहां सिंचाई विभाग की ओर से अपने तर्क दिए गए, वहीं रेवाड़ी बावल व धारुहेड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) के निकलने वाले पानी के समाधान पर भी चर्चा हुई। हालांकि रेवाड़ी के तीन 30 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी के पानी को साबी में डालने के लिए 48 करोड़ र्ुपए की लागत से पाईप डालने का काम चल रहा है, लेकिन शनिवार को हुई मीटिंग के दौरान वहां पर मौजूद विधायक जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सकते में डाल दिया। उन्होंने कहा कि बायोलौजीकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 10 तक होने पर ही पानी मसानी बैराज में डाला जाना चाहिए। ऐसा नहीं किया गया तो भूल जल स्तर खराब हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बैराज में सिंचाई विभाग की ओर से नहरी पानी भरने से भूजल स्तर बढ़ा है। इसका आसपास के गांवों को लाभ भी मिला है। उन्होंने कहा कि पानी डालने से पहले इसकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग जरुरी है। ताकि सभी इसके बारे मेें जानकारी ले सकें।
विज्ञापन

भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र निकले वाले पानी को साबी में डालने विचार
राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला दूषित पानी हरियाणा के धारुहेड़ा के लिए बड़ी परेशानी का कारण रहा है। इसके लिए यहां के लोग एनजीटी तक जा चुके हैं, बावजूद इसके कोई समाधान नहीं हो पाया है। भिवाड़ी से निकलने वाला यह गंदा पानी धारुहेड़ा के गांवों में भरा रहता है, इससे भूजल स्तर खराब हो रहा है। एनजीटी की जांच में भी यह सामने आ चुका है। इसको लेकर विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने बताया कि भिवाड़ी में पांच एसटीपी तो बन रहे हैं, लेकिन उनके पास डिस्पोज की व्यवस्था नहीं है। यदि वहां के अधिकारी भी वहां से निकलने वाली पानी की बीओडी 10 तक करें तो साबी नदी में इस पानी को डालकर स्थाई समाधान निकाला
विज्ञापन

फोटो- 35
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें