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70 में से 33 मोबाइल टावर अवैध, फीस नहीं भरने से हर साल करीब 64 लाख का चूना

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मोबाइल टावर - फोटो : Rewari
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शहर में लगाए गए 70 मोबाइल टावरों की निर्धारित फीस जमा नहीं कराए जाने के कारण नगर परिषद को प्रतिवर्ष 64 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन टावरों में 33 को बिना अनुमति के लगाया गया है। जबकि फायर एनओसी सहित अन्य अनुमति एक के पास भी नहीं है।
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छीपटवाड़ा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता साकेत धींगड़ा द्वारा नगर परिषद से मांगी गई जानकारी मेें यह खुलासा हुआ है।
26 दिसंबर 2018 को नगर परिषद में आरटीआई लगाकर शहर में मोबाइल टावरों की संख्या, वैध व अवैध मोबाइल टावर की संख्या, फीस व फायर एनओसी से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। नप की ओर दी गई जानकारी में बताया गया कि 6 टावर कंपनी की ओर से एक लाख रुपये की सालाना फीस जमा कराई गई हैं। ऐसे में यदि सभी टावर कंपनी की ओर से इस फीस को जमा कराया जाता सरकारी राजस्व में हर साल 64 लाख रुपये और ज्यादा आ सकता था। इससे शहर में विकास कार्य कराए जा सकते थे। लेकिन पॉलिसी के अभाव में ऐसा नहीं हो पाया।
रिकार्ड में 33 मोबाइल टावर अवैध, सील सिर्फ दो किए
आरटीआई द्वारा मांगी गई जानकारी में नगर परिषद की तरफ से बताया गया कि शहर में कुल 75 मोबाइल टावर लगे हुए है। इनमें 42 के पास परमिशन है, जबकि 33 अवैध तरीके से लगे हुए है। वर्ष 2010 से 2019 तक के बीच अवैध टावरों पर कार्रवाई करते हुए शहर के आनंद नगर में लगे दो टावरों को सील किया गया था। अन्यों को नोटिस देकर खानपूर्ति की गई है।
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नियमों की भी हुई अनदेखी
एक मोबाइल टावर लगवाने के लिए नगर परिषद में 1 से सवा लाख रुपए की फीस जमा करानी होती है। उसके बाद दमकल विभाग से फायर एनओसी लेनी होती। नियमानुसार भवन के आसपास स्कूल या फिर कोई ऐसा संस्थान नहीं होना चाहिए, यहां बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हो। बाद में भवन पर मोबाइल टावर लगवाया जा सकता है। लेकिन यहां सब नियम ताक पर रख कर मोबाइल टावर लगे हुए हैं। वर्ष 2012 से पहले सिर्फ 11 लोगों ने ही नगर परिषद में फीस कटवाई हुई है। रिकार्ड में जो 42 टॉवर है, उनमें भी अधिकांश ने फीस नहीं कटवाई हुई।
सील होने चाहिए मोबाइल टावर : धींगड़ा
आरटीआई कार्यकर्ता साकेत धींगड़ा ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद उसने डीसी यशेन्द्र सिंह को शिकायत दी है। शिकायत में बताया है कि अवैध टावरों को सील क्यों नहीं किया जाता। इतने सालों में सिर्फ 2 ही मोबाइल टावर सील करना नगर परिषद की कार्यप्रणाली को उजागर करता है।
2018 में आई नई पॉलिसी : ईओ
नप ईओ मनोज यादव ने कहा कि शुरुआती समय में नप की ओर से अनुमति दी जाती थी। लेकिन इस दौरान कंपनी संचालक कोर्ट में चले गए। कोर्ट की ओर से निर्देश दिए गए थे कि नई पालिसी तक कोई भी दंडकारी नीति ने अपनाई जाए। नप की ओर से सभी कंपनी टांवर संचालकों को लगातार नोटिस भेजे गए हैं। वर्ष 2018 में नई आईटी पॉसिली के साथ जिला की टेलीकॉम समिति के पास ऑनलाइन आवेदन किया जाता है, इसके बाद हमारे पास फाईल आती है। एक प्रोसेस के तहत फीस उनके पास आती है। अभी तक 6 कंपनी की फीस आई है, सभी को जमा करानी पड़ेगी।
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