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19 खरीद केंद्रों पर खुले में पड़ी लाखों क्विंटल सरसों व गेंहू बारिश में भीगी

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रेवाड़ी की नई अनाज मंडी में खुले में रखे गए गेहूं के नीचे भरा पानी। - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद प्रशासन मंडियों में गेंहू और सरसों की फसल को भीगने से नहीं बचा सके। शनिवार रात और रविवार को जिले में हुई 9.2 एमएम बारिश सेे अधिकांश अस्थायी मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी पैदावार भीग गई। रेवाड़ी, बावल और कोसली में स्थायी मंडी हैं यहां भी बारिश में केवल वहीं पैदावार बची रही जो टीन शैड के नीचे थी, लेकिन 19 स्थानों पर बनाई गई अस्थायी मंडियों में व्यापक स्तर पर बारिश से बचाने की व्यवस्था नहीं की गई है। जिले में अब तक एक लाख 78 हजार 510 क्विंटल सरसों और दो लाख 55 हजार 860 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी हैं।
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बता दें कि 22 मंडियों में केवल तीन मंडी स्थायी हैं लेकिन कोरोना संक्रमण से बचाव व सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए जिले में बनाई गई 19 अस्थायी मंडियों में फसल खुले आसमान के नीचे रखी गई थी। मौसम विभाग की बार-बार चेतावनी के बावजूद भी बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन भी जिम्मेदार नहीं जुटा पाए जिसके कारण मंडियों में हजारों क्विंटल गेहूं और सरसों भीग गया। मौसम विभाग की ओर से पूर्व में ही रविवार को अंधड़ व बारिश की चेतावनी दी गई थी। रविवार दोपहर 1 बजे से डेढ़ बजे तक करीब आधे घंटे हुई बारिश के कारण शहर में जगह-जगह पानी जमा हो गया।
- रेवाड़ी की नई अनाज मंडी में भीगा गेहूं
रेवाड़ी क्षेत्र में गेहूं खरीद के लिए बनाई गई 6 अस्थार्यी मंडियों में अब तब कुल 65 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। इसमें से उठान आधे गेहूं का भी नहीं हो पाया है। जबकि सरसों खरीद के लिए बनाए गए 7 केंद्रों पर 1 लाख 50 हजार क्विंटल सरसों की खरीद की गई है। ऐसे में खरीद किया गया गेहूं टीन शैड से बाहर था उसके नीचे बारिश का पानी जमा हो गया। ट्रैक्टर-ट्रालियों में अपनी पैदावार भरकर पहुंचे अनेक किसानों के पास बारिश आने की स्थिति में अपनी पैदावार को बचाने के संसाधन नहीं होने के कारण गेहूं बारिश में भीगता रहा। लेबर के अभाव में सही समय पर उठान नहीं होने से बिठवाना मंडी में सरसों तथा नई अनाज मंडी में गेहूं के हजारों बैग व खुली ढेरियों में उतारा गया गेहूं भी बारिश की भेंट चढ़ गया।
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बावल से 14 किलोमीटर की दूरी में हो रहा 14 घंटे का समय बर्बाद
बावल से रेवाड़ी की दूरी मात्र ही 14 किलोमीटर है लेकिन रेवाड़ी गोदाम पहुंचने में गाड़ियों को भी 14 से 15 घंटे का समय लग रहा है। लेबर के अभाव में जल्द ही गाड़ियां अनलोड नहीं होने से मंडियों में उठान प्रक्रिया भी धीमी गति से चल रही थी जिसके कारण खुले आसमान के नीचे पैदावार को रखा गया था। बारिश आने के बाद मार्केट कमेटी कर्मचारियों ने भागदौड़ शुरू की जिसके बाद कुछ ही ढेरियों व बैगों को ढक पाए। मौसम विभाग की ओर से 30 अप्रैल तक मौसम परिवर्तनशील रहने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन चेतावनी से भी कोई सबक नहीं लिया। लगातार दो दिन से हो रही बूंदाबांदी व बारिश के कारण बावल, बनिपुर व टांकड़ी मंडियों में खरीदी गई सरसों व गेहूं की पैदावार भीग रही है।
कंवाली मंडी में आधी पैदावार पर ही ढक पाए तिरपाल
कंवाली मंडी में रविवार को करीब एक हजार क्विंटल गेहूं तथा 1500 क्विंटल सरसों की खरीद की गई। पहले से खरीद की हुई दोनों ही पैदावार उठान के अभाव में अधिकांश खुले आसमान के नीचे ही पड़ी थी। लेकिन दोपहर बाद जब अचानक बूंदाबांदी शुरू हुई तो जिम्मेदारों ने लेबर को तिरपाल ढकने के आदेश दिए। जिसके बाद आननफानन में केवल आधी पैदावार पर ही तिरपाल ढके गए। मंडी में खुले आसमान के नीचे खरीद चल रही है। ऐसे में किसानों की ओर से ढेरियां लगाई जा रही हैं।
कोसली क्षेत्र की अस्थाई मंडियों में पैदावार में बढ़ी नमी
कोसली क्षेत्र में अनाज मंडी कोसली के अलावा कोसली कालेज, जाटूसाना पंचायत स्टेडियम, बार माल्ट केंद्र, कंवाली पंचायत स्टेडियम, गुरावडा पंचायत स्टेडियम में अस्थाई मंडियों में खरीद की जा रही है। यहां भी व्यापक व्यवस्थाएं नहीं होने से खरीद की गई पैदावार में नमी की मात्रा बढ़ गई है। ऐसे में इन खरीद केंद्रों पर अब आगे खरीद प्रक्रिया में परेशानी आने की संभावना बनी रहेगी। लेबर के अभाव में यहां भी उठान की स्थिति अच्छी नहीं है।
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