रेवाड़ी। राजकीय स्कूलों में अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थी पढ़ाई के साथ अब कमाई भी करेंगे। हरियाणा स्कूल परियोजना परिषद की ओर से इसकी तैयारियां की जा रही हैं। बावल स्थित राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में वीटा मिल्क बूथ खोला जाएगा, जिसके लिए समग्र शिक्षा के जिला परियोजना संयोजक (डीपीसी) कार्यालय की ओर से संबंधित बीआरसी (खंड संसाधन संयोजक) को 2 लाख रुपये का बजट जारी कर दिया गया है। इस बूथ को दिव्यांग विद्यार्थियों को अलाट किया जाएगा।
बता दें कि हरियाणा स्कूल परियोजना परिषद की ओर से मार्च में प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक वीटा मिल्क बूथ खोलने के आदेश जारी किए गए थे। जिले के राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बावल में वीटा मिल्क बूथ खोला जाना है। इस बूथ पर परिषद की ओर से दूध, दही, पनीर और घरेलू सामान उपलब्ध कराया जाएगा।
ये रहेंगी बूथ को संचालित करने की गाइडलाइन
बूथ को संचालित करने के लिए एक स्वयं सहायता समूह का गठन किया जाएगा। इसमें 8 दिव्यांग विद्यार्थी, 4 सामान्य विद्यार्थी, एक स्पेशल शिक्षक, दिव्यांग छात्र के एक अभिभावक व एक सामान्य शिक्षक शामिल होंगे। यह समूह विद्यालय प्राचार्य की निगरानी में कार्य करेगा। दिव्यांग छात्रा होने की स्थिति में प्राचार्य निकटतम सहयोगी, भाई या माता को बूथ के संचालन के लिए चयनित कर सकते हैं। प्राचार्य द्वारा रोटेशन अनुसार एक समूह की 3 घंटे के लिए सुबह 7 से शाम 7 बजे के बीच ड्यूटी लगाई जाएगी। उत्पादों की बिक्री के लिए रेट संबंधित प्राचार्य द्वारा निर्धारित किए जाएंगे तथा प्रतिदिन होने वाली बिक्री का रिकार्ड भी रखना होगा। उत्पाद की खरीद व बिक्री के रिकार्ड का संबंधित स्कूल के लेखा अधिकारी द्वारा प्रतिमाह आडिट भी किया जाएगा। स्पेशल व व्यवसायिक शिक्षकों द्वारा दिव्यांग व सामान्य विद्यार्थियों को वीटा मिल्क बूथ खुलने से एक सप्ताह पूर्व ग्राहकों के साथ व्यवहार तथा बूथ के प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। वीटा बूथ पर सीसीटीवी कैमरा भी लगाए जाएंगे और संबंधित प्राचार्य बूथ के प्रबंधन पर पूरी नजर रखेंगे।
वर्जन
बावल में वीटा मिल्क बूथ खोलने के लिए बीआरसी को दो लाख रुपये का बजट जारी कर दिया गया है। वहीं बूथ से प्राप्त होने वाली 75 फीसदी आय दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेगी और 25 फीसदी राशि स्कूल के विकास कार्यों में खर्च की जाएगी। इस बूथ के संचालन से जहां विद्यार्थियों में व्यवसायिक कौशल का विकास होगा, वहीं उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
- मुकेश यादव, जिला परियोजना संयोजक समग्र शिक्षा