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कोटा से आए विद्यार्थियों की कोविड-19 जांच रिपोर्ट आने से पहले ही भेजा घर, उठे सवाल

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रेवाड़ी। कोटा से लाए गए 66 छात्रों को शुक्रवार रात को ही मीरपुर विवि में क्वारंटीन कर दिया गया था। छात्रों के स्वास्थ्य की जांच कर उनके सैंपल लैब में भेज दिए गए थे, लेकिन प्रशासन ने छात्रों की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही सभी छात्रों को उनके घर भेज दिया। ऐसे में सवाल यह है कि कोरोना जांच रिपोर्ट आने से पहले ही छात्रों को घर भेजने की क्या जल्दी थी। जबकि आमतौर पर कोविड-19 सैंपल लेने के बाद संदिग्ध को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया जाता है। जांच रिपोर्ट नेगेटिव पाए जाने पर ही उसको छुट्टी दी जाती है। लेकिन कोटा से लाए गए छात्रों के मामले में इसका पालना क्यों नहीं हुआ यह जांच का विषय है।
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बता दें कि राजस्थान के कोटा में फंसे छात्रों को लेने के लिए शुक्रवार सुबह के समय बसें पहुंची थी और रात के डेढ़ बजे वापस रेवाड़ी पहुंची थी। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद सभी छात्रों को आईजीयू स्थित तीन हॉस्टल में क्वारंटीन कर दिया गया था। इसके बाद रविवार सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक सभी के कोविड-19 सैंपल लिए गए थे। बताया गया था कि छात्रों को क्वारंटीन सेंटर में ही रखा जाएगा। सभी छात्रों की जांच रिपोर्ट रविवार शाम तक आनी थी। लेकिन जांच रिपोर्ट आने से पहले सभी छात्रों और अभिभावकों रात के समय उनके घर भेज दिया गया।
एक भी विद्यार्थी पॉजिटिव पाया गया तो पड़ सकता है भारी
यूं तो स्वास्थ्य विभाग प्रशासन की संवेदनशीलता के चलते जिला अभी कोरोना के संक्रमण से बचा हुआ है, लेकिन रविवार की रात की गई लापरवाही कहीं भारी न पड़ जाए। घर भेजने से पहले सैंपल लेने कारण यही था कि इस बात का पता किया जा सके कि कहीं कोई बच्चा संक्रमित तो नहीं है। ऐसे में सवाल है कि यदि एक भी छात्र कोरोना से संक्रमित पाया गया तो यह प्रशासन के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है।
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नोडल अधिकारी बोले- कोटा में बीते 1 माह से हैं क्वारंटीन
जिले के कोविड-19 अधिकारी डॉ. विजय प्रकाश ने बताया कि सभी छात्रों को रात के समय भेज दिया गया है। सैंपल रिपोर्ट आने से पहले रविवार की रात ही घर भेजने के सवाल पर डॉ. विजय प्रकाश ने बताया कि सभी छात्र 1 माह से कोटा में ही क्वारंटीन थे। इसके चलते यह निर्णय लिया गया है। लेकिन जब यह पूछा गया है कि जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा सकता था तो उस पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
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