बस स्टैंड पर खड़ीं हरियाणा रोडवेज की बसें।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। सड़कों पर सरपट दौड़ रही हरियाणा रोडवेज की बसों में लगे फर्स्ट एड बॉक्स में रखी दवाइयों की डेट एक्सपायर हो चुकी हैं। ऐसे में अगर रास्ते में कोई हादसा हो जाए तो यात्रियों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाएगा। रेवाड़ी डिपो में तीन साल से नए फर्स्ट एड बॉक्स नहीं रखे गए हैं।
रोडवेज प्रशासन द्वारा यात्रियों को बेहतर सुविधा देने का वादा किया जाता है और किराए की रकम भी वसूली जाती है। इसके बाद भी यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। रेवाड़ी डिपो में 150 बसें हैं। रेवाड़ी डिपो से जयपुर, दिल्ली, खाटूश्याम, जालंधर, चंडीगढ़, जम्मू कटरा सहित अन्य लंबे रूटों पर बसों का संचालन किया जाता है। जर्जर सड़कों पर रोडवेज की बसें फर्राटा भरती नजर आती हैं और अक्सर छोटी-छोटी दुर्घटनाएं भी होती रहती है। ऐसे किसी संकट के समय के लिए बसों में फर्स्ट एड बॉक्स रखा जाता है। लेकिन रेवाड़ी डिपो की बसों में तीन साल से इसे बदला ही नहीं गया है। बसों में लगे फर्स्ट एड बाक्स या तो टूट चुके हैं या तो गायब हैं। बॉक्स में रखी दवाइयां व मरहम पट्टी का तो पता नहीं है। ऐसे में अगर कोई दुर्घटना घट भी जाए तो यात्रियों सहित चालक-परिचालक के प्राथमिक उपचार के लिए कोई सुविधा नहीं है। नियमानुसार इन प्राथमिक उपचार के बाक्स में बैंडेज, पट्टी, रुई और दवा होनी जरूरी है। प्रत्येक रोडवेज बस में चालक सीट के पास एक फर्स्ट एड बॉक्स होना आवश्यक है। जिसमें दुर्घटना हो जाने पर प्राथमिक चिकित्सा संबंधी जरूरी इलाज दी जा सके। लेकिन रोडवेज की अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स ही मौजूद नहीं हैं।
परिचालकों को रखने से पहले दी जाती है 10 दिन की ट्रेनिंग:
हरियाणा रोडवेज में परिचालक पद पर लगने से पहले फर्स्ट एड का कोर्स करना होता है। इसमें करीब दस दिन घायल लोगों को प्राथमिक उपचार देना सिखाया जाता है। इसमें मरहम व पट्टी भी शामिल हैं। इसलिए सभी रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स लगाए जाते हैं। इनमें चोट लगने पर मरहम पट्टी व दर्द रोधक दवाएं होती हैं। प्रत्येक रोडवेज बस में चालक सीट के पास एक फर्स्ट एड बॉक्स होना आवश्यक है। जिससे दुर्घटना हो जाने पर प्राथमिक चिकित्सा संबंधी जरूरी दवा दी जा सके। वहीं रोडवेज की फ्लाइंग टीम की ओर से चेकिंग के समय यात्रियों के टिकट जांच लिए जाते हैं। परिचालकों के थैले में एकत्रित टिकट और राशि का मिलान भी कर लिया जाता है। लेकिन कभी फर्स्ट एड बॉक्स में जरूरी सामान रखा है या नहीं इस बारे में कभी ध्यान नहीं दिया जाता। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
रोडवेज महाप्रबंधक अशोक कौशिक ने बताया कि फर्स्ट एड बाक्स को लेकर डिपो में इस प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। अगर किसी परिचालक को जरूरत है तो विभाग से ले सकता है। अगर कोई कर्मचारी, परिचालक को फर्स्ट एड देने से मना मना करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।