कुंड। क्षेत्र का मनेठी गांव की पहचान समृद्ध धार्मिक परंपराओं और प्राचीन मंदिरों के कारण है। गांव में स्थित कई मंदिरों का इतिहास सौ वर्ष से अधिक पुराना है। यहां स्थित प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बने हुए हैं। सावन के महीने में यहा दूर-दूर से श्रद्धालु आकर जलाभिषेक करते हैं।
गांव में स्थित बाबा डाबली हनुमान मंदिर सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से यहां आकर बाबा के चरणों में अपनी मनोकामना रखता है, उसकी इच्छा अवश्य पूरी होती है।
इसी आस्था के चलते वर्षभर श्रद्धालुओं का यहां आना-जाना लगा रहता है। मंदिर में हर वर्ष लगभग 15 भंडारे का आयोजन किया जाता है।
गांव का बाबा भैया शिव मंदिर काफी प्राचीन है। यह मंदिर कई वर्षों से शिव भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। विशेष रूप से सावन माह में यहां धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में कांवड़िए पवित्र जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
सावन के दौरान मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।
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बाबा ध्यान दास मंदिर का विशेष महत्व
गांव में स्थित बाबा ध्यान दास मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व बताया जाता है। यह मंदिर कई पीढ़ियों से श्रद्धा का केंद्र रहा है। लोगों के बीच यह मान्यता भी प्रचलित है कि महाभारत काल में पांडव अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में ठहरे थे। हालांकि इसके ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं लेकिन यह कथा वर्षों से गांव के लोगों के बीच सुनाई जाती रही है। लोगों की काफी आस्था है। यहां पर पानी एक कुंड भी है, जिसे किशन तालाब कहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुंड में पांडवों ने स्नान किया था। मनेठी गांव के पास बाबा नानक दास का भी मंदिर है, जो काफी प्रचलित है। पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं ने इन मंदिरों को क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बना दिया है।
बाबा ध्यान दास मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। मंदिर में आने वाले लोगों को मानसिक शांति मिलती है और वे अपनी मनोकामनाओं के साथ यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।-महंत रामवेश्वर दास, बाबा ध्यान दास मंदिर।
बाबा भैया शिव मंदिर गांव की धार्मिक पहचान है। सावन में यहां दूर-दूर से कांवड़िए शिव का अभिषेक करते हैं। मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। सावन में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम गांव में आध्यात्मिक वातावरण बना देते हैं और युवाओं को भी अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं।-लीलू प्रधान
गांव में स्थित बाबा ध्यान दास मंदिर का भी विशेष धार्मिक महत्व है। लोगों के बीच यह मान्यता भी प्रचलित है कि महाभारत काल में पांडव अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में ठहरे थे। यह कथा वर्षों से गांव के लोगों के बीच सुनाई जाती रही है।-धर्मेंद्र यादव
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बाबा डाबली हनुमान मंदिर काफी प्राचीन है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में हर समय श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। मनोकामना पूरी होने पर लोग भंडारे करवाते हैं। सालभर में कई भंडारों का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के गांवों के लोग भी बड़ी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।-सरस चंद्रहास, समाजसेवी
प्रसाद ग्रहण करते लोग। संवाद