कार्यशाला में संबोधित करते जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप दहिया। स्रोत : विभाग
रेवाड़ी। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप दहिया ने कहा कि कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान को अध्यापक अपनी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में व्यावहारिक रूप दें, ताकि विद्यार्थियों को अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि विषयों को रोचक बनाकर पढ़ाना समय की मांग है।
जिससे छात्रों की रूचि और सहभागिता दोनों बढ़ती हैं। वे डायट हुसैनपुर में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
यह कार्यशाला सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली (सीसीआरटी) तथा स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। जिला संसाधन व्यक्ति एवं प्राचार्य अनिल यादव ने बताया कि शिक्षा में नाटक कला विषय पर यह कार्यशाला रेवाड़ी में पहली बार आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि जिले के पांचों खंडों से 150 से अधिक शिक्षक भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उप जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार यादव ने अध्यापकों का आह्वान किया कि वे अपने कार्य का निष्पादन पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि छात्रों के व्यक्तित्व विकास में योगदान देना भी है।
कार्यशाला के दौरान सीसीआरटी की फील्ड ऑफिसर डॉ. जुलेसा सिद्धार्थ, कोमल, तरूण कुमार तथा वरिष्ठ कार्यक्रम समन्वयक विनोद कुमार ने शिक्षा के क्षेत्र में सांस्कृतिक पहल के तहत चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी।
उन्होंने शिक्षा में रंगमंच की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नाटक के माध्यम से बच्चों की अभिव्यक्ति क्षमता, आत्मविश्वास और रचनात्मकता को विकसित किया जा सकता है।