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जिले में चौथी बार टिड्डी दल के हमले ने किसानों की बढ़ाई परेशानी

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जिले में डेढ़ माह के दौरान चौथी बार टिड्डी दल का हमला होने से किसानों में हड़कंप मच गया। मंगलवार को नाहड़ खंड के गांव भाला, नयागांव, गढ़ी से जिला की सीमा में प्रवेश किया। पड़ोसी जिले की सीमाओं से सटे गांवों के किसानों से सूचना पाकर जिला के किसान भी थाली एवं ड्रम लेकर अपने खेतों में पहुंच गए। गनीमत यह रही है कि हवा पश्चिमी की और से तेज रुख होने व किसानों की जागरूकता से टिड्डी दल नीचे भी नहीं उतर पाया। 6 किलोमीटर लंबे एवं 3 किलोमीटर चौड़ाई वाला यह दल करीब एक घंटें में पड़ोसी जिला झज्जर के खेड़ा थरू व बहु के रास्ते प्रवेश कर गया।
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जिले में चार बार हो चुका है हमला
जिले में पहली बार 26 जून को पहली बार पड़ोसी जिला के गांव करीरा, कोटिया, बोहका, भड़फ आदि के रास्ते जिला की सीमा में प्रवेश किया था। जिला में पहली बार 10 किलोमीटर लंबे व 6 किलोमीटर चौड़ाई वाले इस दल ने रात को परखोतमपुुर, भोतवास व जाटुसाना गांवों में रात्रि ठहराव किया था। 27 जून को स्वयं कृषि मंत्री जेपी दलाल ने पहुंचकर जायजा लिया था। इसके उपरांत दूसरी बार 12 जुलाई को टिड्डी दल ने हमला किया था जो कोसली व भाकली में रात्रि ठहराव किया था। इस दौरान उपायुक्त सहित प्रशासनिक एवं कृषि अधिकारी रातभर स्प्रै किया था। जिले में तीसरी बार 13 जुलाई को बावल खंड के गांव खिजुरी भादोज, नंगली परसापुर, पावटी आदि गांवों में राजस्थान की सीमा से प्रवेश किया था। वहीं अब चौथी बार जिले में मंगलवार सुबह नाहड़ खंड के गांव भाला, नयागांव, गढ़ी आदि गांवों की सीमाओं से जिला में प्रवेश किया है।
किसानों की सूचना के बाद पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
नाहड़ खंड के गांवों में जैसे ही टिड्डी दल ने प्रवेश किया तो किसानों द्वारा कृषि विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। सूचना पाकर जिलेभर के कृषि अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। लेकिन किसानों की जागरूकता के चलते यह दल खेतों में खड़ी फसलों पर नहीं बैठ सका। इस दौरान किसानों ने थाली, ड्रम बजाने के साथ-साथ बाइकों से दल को खदेड़ा।
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