रेवाड़ी। कोरोना वासरस के प्रकोप के चलते पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा है, इससे अपराधों में भी कमी आ गई है। जिन झपटमारों, बदमाशों, तस्करों को पुलिस और कानून का डर नहीं था उन्हें कोरोना वायरस ने डरा दिया है। जिले में संगीन अपराध में 100 प्रतिशत और अन्य अपराध में 90 से 95 प्रतिशत तक कमी आई है। जिले के 15 पुलिस थानों में धारा 188 के मामलों को छोड़ दिया जाए तो महज 21 मुकदमे दर्ज हुए हैं।
कोरोना के कारण लागू किए गए कर्फ्यू के कारण जहां सड़क हादसे में काफी कमी आई वहीं शराब तस्करी, चोरी और अन्य अपराध भी कम हुए हैं। कोरोना से पहले की बात की जाए तो अधिकतर मामले शराब तस्करी, अन्य नशे की तस्करी, मारपीट और चोरी को लेकर दर्ज किए जाते थे जो कि कोरोना के बाद से काफी कम हो गए है। हत्या, गैर इरादतन हत्या, सुसाइड और दुष्क र्म जैसे क्राइम पर तो अंकुश ही लग गया है। यह कहने से इंकार नहीं किया जा सकता कि जिन बदमाशों, तस्करों को पुलिस और कानून का कोई डर नहीं था, उन्हें अब कोरोना ने डरा दिया है।
लॉकडाउन के बाद स्थिति
अपराध -केस
हत्या -0
गैर इरादतन हत्या -1
सुसाइड -1
रेप- 0
लूट- 0
चोरी -3
सड़क हादसे -2
शराब तस्करी -5
अन्य नशों की तस्करी -9
मारपीट -3
दहेज प्रताड़ना 0
संगीन अपराध हुआ जिले से खत्म
लॉकडाउन से पहले की बात की जाए तो शराब तस्करी के औसतन रोजाना 2 से 5, अन्य नशों की तस्करी के 5 से 10, चोरी के 3 से 5 मामले दर्ज किए जाते थे। इसके अलावा सड़क हादसों में भी लोगों की जान चलती जाती थी। हत्या, गैर इरादतन हत्या, दुष्कर्म का भी कभी-कभी कोई मामला सामने आ जाता था। परंतु लॉकडाउन होने बाद उक्त सभी अपराध कम हो गए।
सड़कों पर नहीं घूम पा रहे चोर और अपराधी
जिला में लॉकडाउन के दौरान कोई गंभीर अपराध नहीं हुआ है। पिछले 13 दिनों में जिले के 15 थानों में महज 21 केस दर्ज हुए हैं। जिले में जगह-जगह पुलिस का प्वाइंट लगने से शातिर अपराधियों के हौसले भी पस्त है। वाहनों पर नियंत्रण होने के कारण दुर्घटनाएं भी नहीं हुई हैं। पुलिस की पेट्रोलिंग और नाकेबंदी से अपराधिक किस्म के युवक फिलहाल घरों में ही हैं।
पुलिस अधीक्षक नाजनीन भसीन ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान जिलावासी पुलिस को पूर्ण सहयोग दे रहे हैं। सभी लोग अपने घरों में रहकर कोरोना से बचने के लिए लॉकडाउन की पालना कर रहे हैं। यहीं कारण है कि जिले में अपराध में भी कमी आई है। वैसे भी जिला के लोग शांति प्रिय है।