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रोजी-रोटी पर बनी तो सड़कों पर उतरें स्थानीय ग्रामीण

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बावल। कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 56 दिन से हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर धरना पर बैठे राजस्थान व पंजाब के किसानों को अब स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को ग्रामीणों की चेतावनी के बाद मसानी बैराज व गंगायचा टोल पर बैठे किसानों ने पड़ाव को खत्म कर दिया गया है। वीरवार को खेड़ा बॉर्डर करीब 15 गांवों के ग्रामीणों व पेट्रोल पंप संचालकों ने महापंचायत कर हाईवे खाली करने की चेतावनी दी है। इस दौरान एक बार हाईवे पर तनाव की स्थिति बनी गई। स्थानीय लोगों ने हरियाणा पुलिस पर दबाव बनाते हुए बैरिकेड हटाने की मांग की, लेकिन आंदोलित किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद बैरिकेड के आसपास पुलिस व अर्ध सैनिक बलों की संख्या को बढ़ा दिया गया।
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बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान व पंजाब के किसानों को हरियाणा पुलिस की ओर से 13 दिसंबर को दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर बैरिकेड व अन्य अवरोधक लगाकर रोक दिया गया था। इसके बाद से सैकड़ों किसानों नेे वहीं पर ही पड़ाव डाला हुआ है, जिससे हाईवे के रास्ते वाहनों का आवागमन पूर्णतया बंद हो गया है। इसके साथ ही खेड़ा बॉर्डर स्थित करीब डेढ़ सौ पेट्रोल पंप व 500 से अधिक दुकानों में कामकाज ठप हो गया। ऐसे में दुकानदारों व पेट्रोल पंप संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। करीब 15 दिन पूर्व स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर दुकानदारों व पेट्रोल पंप संचालकों ने महापंचायत कर हाईवे चालू कराने की मांग की थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका था। वीरवार को करीब 15 गांवों के ग्रामीणों, पेट्रोल पंप संचालकों व दुकानदारों ने महापंचायत कर हरियाणा पुलिस से बैरिकेड हटाने की मांग की तथा आंदोलित किसानों को नकली किसान बताते हुए यहां से चले जाने की चेतावनी दी।
तनाव को देखते हुए बढ़ाया पुलिस बल
महापंचायत में एलान किया कि बॉर्डर के दूसरी ओर आंदोलन करने वाले किसान तुरंत हाईवे से हट जाए नहीं तो स्थानीय ग्रामीण उन्हें अपने तरीके से हटाएंगे। हालांकि महापंचायत में पहुंचें पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया, स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि उनके सामने रोजी-रोटी का संकट हो गया है। ऐसे में हाईवे को तत्काल चालू कराया जाना चाहिए।
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देर रात तक नहीं निकला कोई समाधान
महापंचायत के बाद आंदोलित स्थानीय लोगों व प्रशासन के प्रतिनिधियों के बीच देर रात तक बातचीत चलती रही, लेकिन हाईवे को खोले जाने को लेकर कोई समाधान नहीं निकल सका। हालांकि इस दौरान धारा 144 का भी हवाला दिया गया, लेकिन वीरवार को दिनभर इसका जमकर उल्लंघन किया गया
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