कोसली। सैनिकों की खान कहे जाने वाले कोसली क्षेत्र के गांव जुड्डी में सैनिक दीपक कुमार की शहादत ने न केवल परिवार पूरे गांव से लेकर जिले में मातम छाया हुआ है। बता दें कि बुधवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम के शमसीपोरा हाईवे पर गश्त कर रहे सुरक्षा बलों का दस्ता आईईडी विस्फोट की चपेट में आ गया, जिसमें कोसली क्षेत्र के गांव जुडडी निवासी दीपक कुमार शहीद हो गए। इस दौरान तीन अन्य जवान भी घायल हो थे। दीपक की शहादत के बाद जहां दो बहनों पर भाई का साया उठ गया, वहीं अपने माता पिता का इकलौता बेटा चला गया। आतंकी करतूतों के चलते 10 वर्षीय रोहन के सिर से पिता का सहारा छिन गया। शहीद की पत्नी पिंकी का रो रोकर बुरा हाल है, मगर फिर भी वह अपने बेटे को जरा सा अहसास नहीं होने दे रही है कि रोहन के पिता अब इस संसार में नहीं रहे हैं। शहीद का शव वीरवार को गांव में पहुंचना था, लेकिन देर रात तक शव नहीं पहुंच सका था।
23 जनवरी 2005 में भर्ती हुआ था दीपक
गांव जुडडी के रहने वाले दीपक कुमार 23 जून 2005 को 12 आर्म्ड रेजिमेंट में बतौर सैनिक भर्ती हुए थे, पिता श्रीकृष्ण भी सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त थे। साल्हावास स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से 12वीं पास करने वाले दीपक की माता राज देवी ने अपने इकलौते बेटे को देश सेवा के लिए तैयार किया था। सितंबर 2019 से दीपक कुलगाम में 24 आरआर बटालियन में तैनात थे। बुधवार की सुबह दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में सेना की रोड ओपनिंग पार्टी पर आतंकियों द्वारा आईईडी से किए गए हमले में दीपक देश के लिए शहीद हो गए। बुधवार को ही सेना द्वारा दीपक के परिजनों को दीपक के शहीद होने की सूचना दे दी गई थी। गांव में पसरा मातम
गांव में पसरे मातम के माहौल में हर कोई शहीद की पत्नी पिंकी, माता राज देवी सहित पूरे परिजनों को ढांढस बंधा रहा है। पति के शहीद होने की जैसे ही पत्नी पिंकी को जानकारी मिली, वह तभी से बेहोशी की हालत में चली जाती है। दस साल के बेटे रोहन का इस बारे में कुछ पता नहीं है।
दीपक की शहादत पर पूरे गांव को गर्व
गांव के सरपंच राजेंद्र सिंह ने कहा कि दीपक की शहादत से पूरा गांव सदमे में हैं। उनकी शहादत की सूचना परिजनों को कल दोपहर को ही मिली थी। सरपंच ने बताया कि दीपक की शहादत पर पूरे गांव को गर्व है, दीपक बहुत मेहनती और होनहार था। सेना की ओर से शुक्रवार तक शव गांव जुडडी पहुंचने की बात कही जा रही है। दीपक के चचेरे भाई अनिल ने बताया कि गांव के राजकीय स्कूल में प्राथमिक शिक्षा हासिल करने के बाद वह निजी स्कूल में पढ़े और उसके बाद सेना में भर्ती हुए। उन्होंने बताया कि दीपक बड़ा ही मिलनसार था। जब छुट्टी आता था तो गांव में सभी से मिलकर जाता था। दीपक की शहादत पर पूरे गांव को गर्व है।
जहां पर प्रारंभिक शिक्षा, उसी स्कूल में अंतिम संस्कार
दीपक की शहीद होने की सूचना मिलते ही ग्रामीण दीपक के घर पहुंचने शुरू हो गए । वीरवार को ग्रामीणों ने शहीद की अंत्येष्टि गांव के स्कूल के खेल मैदान में करने का सामूहिक निर्णय लिया है। आपको बता दें कि दीपक ने इसी स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी। अब इसी स्कूल के खेल मैदान में शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार आज गांव के स्कूल में किया जाएगा।
शहीद दीपक(फाइल फोटो)- फोटो : Rewari