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Rewari News: एसडीएम के खिलाफ वकीलों का प्रदर्शन, तबादला होने तक जारी रहेगा धरना

Tue, 21 Jul 2026 12:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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जिला न्यायालय परिसर में धरना प्रदर्शन करते अधिवक्ता। संवाद
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रेवाड़ी। एसडीएम रेवाड़ी के खिलाफ सोमवार से वकीलों ने हड़ताल पर रहकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान वकीलों ने एसडीएम के खिलाफ नारेबाजी की। वकीलों के धरना-प्रदर्शन पर बैठने के कारण राजस्व अदालत, उपभोक्ता अदालत समेत अन्य अदालतों का कामकाज पूर्ण रूप से ठप रहा।
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वकीलों ने कहा कि जब तक एसडीएम सुरेश कुमार का तबादला नहीं तब तक यह धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने 16 अप्रैल से एसडीएम का तबादला करने की मांग को लेकर उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है। 6 मई को एसडीएम का पुतला फूंका गया था।
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान विश्वामित्र यादव के नेतृत्व में सोमवार को स्थायी रूप से वकीलों ने पार्किंग स्थल में धरना-प्रदर्शन सुबह 10 बजे से शुरू किया जो शाम तक जारी रहा। यह धरना जब तक एसडीएम का तबादला नहीं हो जाता तब तक जारी रहेगा।
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इस मौके पर वकीलों ने एसडीएम सुरेश कुमार पर दुर्व्यवहार करने के कई गंभीर आरोप लगाए। प्रधान विश्वामित्र यादव ने बताया कि इससे पूर्व भी वह उच्च न्यायिक अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन पिछले तीन मास से अधिक समय से जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने यह धरना-प्रदर्शन की कार्रवाई शुरू की है।
उन्होंने बताया कि यह धरना-प्रदर्शन जब तक एसडीएम का तबादला नहीं हो जाता तब तक के लिए जारी रहेगा। वकीलों ने एसडीएम पर स्टांप ड्यूटी अदा करने के मामले में मनमानी का आरोप लगाया।

रोजाना करीब 2 हजार मामलों की होती है सुनवाई
वरिष्ठ एडवोकेट अश्वनी तिवारी ने बताया कि जिला न्यायालय परिसर में 18 से अधिक छोटी-बड़ी अदालतें संचालित होती हैं, जहां प्रतिदिन करीब दो हजार मामलों की सुनवाई होती है। केवल दो अदालतों में ही शुक्रवार को 100 से अधिक सिविल और आपराधिक मामले सूचीबद्ध थे। हड़ताल के कारण इन मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी।

निराश होकर लौटे वादकारी
वकीलों की हड़ताल की जानकारी कई वादकारियों को नहीं थी जिससे उन्हें मामलों में सुनवाई नहीं होने पर लौटना पड़ा। कई लोगों को हड़ताल के बारे में जानकारी मिलने के बाद निराश होकर वापस जाना पड़ा। इससे उन्हें समय और धन दोनों का नुकसान उठाना पड़ा। ग्राहकों का कहना था कि यदि हड़ताल की सूचना पहले मिल जाती तो उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। वहीं, हड़ताल के कारण न्यायिक कार्य भी प्रभावित रहे।
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