कोसली। कोसली-रोहतक मार्ग पर स्थित जर्जर ओवरब्रिज गिराए जाने के बाद अब कोसली के व्यापारी अंडरपास बनाने की मांग कर रहे हैं। ओवरब्रिज के दोनों तरफ बाजार स्थित है। ऐसे में यहां लोगों और व्यापारियों को एक से दूसरी तरफ जाने के लिए छह किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में व्यापारी अंडरपास के पक्ष में हैं।
कोसली व्यापार मण्डल के प्रधान सुभाष गर्ग ने आरोप लगाया है कि ओवरब्रिज को आधा-अधूरा गिरा कर लोक निर्माण विभाग ने मनमानी की है। उन्होंने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी है कि पुन: निर्माण को लेकर जो पिलर पहले के मौजूद हैं, उनकी जांच किस एजेंसी ने की है और उसकी रिपोर्ट में क्या है, इसकी प्रति दी जाए। वहीं क्षेत्र के 80 गांवों के सरपंचों ने हस्ताक्षर युक्त पत्र मुख्यमंत्री को भेजकर तीन मीटर के बनने वाले अंडरपास को रद्द करने की मांग की है। कोसली शहर व आसपास के लोगों की बनी कमेटी ने ओवरब्रिज के स्थान पर अंडरपास बनाया जाए। लोगों ने ओवरब्रिज को गिराते समय जो पिलर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी जांच कराने की मांग की है।
ओवरब्रिज का निर्माण कार्य 2010 में शुरू हुआ था और यह 2012 में तैयार हुआ था। सात साल में ही ओवरब्रिज जर्जर हो गया जिससे 2019 में इसपर भारी वाहनों का संचलन बंद कर दिया गया। इस वर्ष अगस्त में ओवरब्रिज को गिराया गया। बड़ी समस्या यह है कि ओवरब्रिज के दोनों तरफ बाजार है। लोगों को एक-दूरी तरफ जाने के लिए 6 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। प्रशासन ने ना तो कोई वैकल्पिक रास्ता दिया ओर ना ही ओवरब्रिज गिराने के बाद उठती धूल से निजात के लिए कोई कदम उठाया है। मामले को लेकर शहर के लोगों ने पंचायत भी की। प्रशासन और विधायक से भी मिले लेकिन समाधान नहीं निकला। व्यापारियों ने ओवरब्रिज की जगह अंडरपास बनाने की मांग की है। संवाद
शुरू से ही विवादों में रहा है ओवरब्रिज का निर्माण कार्य
ओवरब्रिज शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा है। इसके नामकरण को लेकर कोसली भाकली मुद्दा उठ गया। उस समय निवर्तमान कांग्रेस सरकार ने बिना जांचे परखे ही बिना उद्घाटन व नाम के ओवरब्रिज को चालू करा दिया। ओवरब्रिज चालू होते ही इसकी खामियां सामने आने लगी। गुणवत्ता पर ध्यान न देने के कारण भारी वाहनों के बोझ से ओवरब्रिज जर्जर हो गया। इसको सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। प्रशासन ने 2019 में ओवरब्रिज पर भारी वाहनों का संचलन बंद करा दिया।
जांच में गुणवत्ता पर खरा नहीं उतरा था ओवरब्रिज
कोसली विधायक लक्ष्मण यादव ने 2019 में ओवरब्रिज की गुणवत्ता परखने की मांग की। निजी कम्पनी से गुणवत्ता की जांच करवाई गई तो ओवरब्रिज गुणवत्ता पर खरा नहीं उतरा। इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद विधायक ने ओवरब्रिज को तुड़वाकर बनवाने का प्रयास किया। बाद में ओवरब्रिज के पुनर्निर्माण के लिए टेंडर छोड़ा गया। फिर ओवरब्रिज को तोड़ने का कार्य शुरू किया। उस समय व्यापारियों ने पंचायत करके निर्णय लिया कि इसको तोड़ने से पहले व्यापारियों को व्यापार करने व ग्राहकों सुविधा दी जाए लेकिन प्रशासन ने ओवरब्रिज को 18 जुलाई को ओवरब्रिज तोडना शुरू कर दिया। ओवरब्रिज को तोड़े लगभग डेढ़ माह हो गए लेकिन इसे दोबारा बनाने की प्रक्रिया चालू नहीं की गई है।
वर्जन
पहले से बने पिलर की जांच सीआरआरआई एजेंसी करेगी। इसके बाद ही निर्माण कार्य रिपोर्ट पर निर्भर करेगा की पिलर की स्थिति कैसी है। वैसे निर्माण कार्य के लिए बीम तैयार किए जा रहे हैं।-प्रदीप सिंह, कनिष्ठ अभियंता, लोक निर्माण विभाग।
वर्जन
यह सम्भव नहीं है कि ओवर ब्रिज के स्थान पर अंडर पास बनाया जाए। हां जो तीन मीटर का अंडरपास बनना है उसके बारे में अगर व्यापारियों को व आम लोगों को कोई आपत्ति है तो विचार किया जा सकता है।-लक्ष्मण सिंह यादव, विधायक, कोसली।