किसान भवन और ओवर ब्रिज के नामकरण को लेकर कोसली और भाकली गांव के बीच छिड़ा विवाद बुधवार सुबह खूनी संघर्ष में बदल गया।
बाजार बंद करवाने पहुंचे कोसली के ग्रामीणाें पर भाकली के लोगाें ने लाठी-डंडाें और पत्थराें से हमला बोल दिया, जिसमें कोसली के एक ग्रामीण की मौत हो गई और तीन पुलिसकर्मियों समेत 17 से अधिक लोग घायल हो गए।
मौके पर पहुंचे पुलिस बल ने जैसे-तैसे स्थिति को नियंत्रित किया। कोसली के ग्रामीणाें ने सचिवालय रोड पर जाम लगा दिया है। उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक मौके पर डटे हुए हैं।
सोमवार को प्रशासन ने रेलवे ओवर ब्रिज व अनाज मंडी स्थित किसान भवन का नामकरण भाकली के नाम पर करते हुए शिलापट लगाया था। इस पर कोसली के ग्रामीणों ने ऐतराज जताते हुए सोमवार, मंगलवार को पंचायत कर बुधवार को बाजार बंद का ऐलान किया था।
घोषणा के तहत बुधवार सुबह जब कोसली के लोग बाजार को बंद करवाने के लिए जुलूस के रूप में पहुंचे तो वहां पर पहले से ही मौजूद गांव भाकली के लोगों ने उन पर हमला बोल दिया। देखते ही देखते दोनों गांवों के लोगों में खूनी संघर्ष शुरू हो गया। कोसली के ग्रामीणाें ने अपने बचाव में रेलवे लाइन पर पडे़ पत्थराें से हमला कर दिया। लेकिन भाकली के लोग भारी पड़े।
हमले में कोसली के कई लोग घायल हुए, जिसमें कोसली निवासी महाबीर को गंभीर चोटें आईं, उसे उपचार के लिए रेवाड़ी के ट्रामा सेंटर रेफर किया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। इस बवाल के दौरान बीच बचाव कर रहे तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
महाबीर की मौत की सूचना मिलते ही कोसली के ग्रामीण मिनी सचिवालय के बाहर रोड पर जाम लगा कर बैठ गए। तीन घंटे के बाद भारी पुलिस बल के साथ पुलिस अधीक्षक पंकज नैन व उपायुक्त सीजी रजनी मौके पर पहुंचे। समाचार लिखे जाने तक कोसली पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।
उधर, गांववालों ने पुलिस कप्तान के कोसली थाने से बाहर न निकलने पर विरोध जताया और थाने का घिराव करते हुए सरकारी विरोधी नारेबाजी की।
घायलों के नाम
सुरेश कुमार, रवि कुमार, अभेसिहं, राज सिंह, सुरत सिंह, अनूप, रंगमल, महाबीर, श्रीभगवान, रामनिवास, अशोक, राजू, रामबेहर, सुबे सिंह शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस के तीन जवानों को भी चोटें आई हैं। इसके अलावा पुलिसकर्मी दिनेश कुमार, बलवान सिंह व हजारी लाल घायल हुए।