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Rewari News: भट्टों का संचालन शुरू, ईंटों के कम होंगे दम

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रेवाड़ी। एनजीटी के आदेशानुसार 9 माह बाद जिले में ईंट भट्टों का संचालन शुरू हो गया है। उत्पादन शुरू होने के बाद ईंटों के दाम में भी कमी आने की संभावना रहेगी। दूसरी ओर भट्टे शुरू होने के साथ की प्रदूषण का स्तर एक बार फिर से बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। ईंटों की कमी और महंगे दामों का सामना कर रहे भवन निर्माण करने वाले लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। इस समय जिन भट्टों पर स्टॉक बचा हुआ है। उनके दाम भट्टों पर 6200 रुपये से 7000 रुपये प्रति हजार ईंट तक वसूले जा रहे हैं। यह दाम अपेक्षाकृत काफी अधिक हैं। ईंट भट्टों का संचालन शुरू हो गया है। नई ईंटों को तैयार होने में लगभग 15 दिन का समय लगता है। ऐसे में होली पर्व के आसपास नई ईंटों के दाम 500 से 700 रुपये प्रति हजार तक कम हो सकते हैं। लोगों को डिमांड के अनुसार अच्छी क्वालिटी की ईंटें भी मिलना शुरू हो जाएंगी। भट्टा मालिकों ने फरवरी के शुरू में ही कच्ची ईंट तैयार कराना शुरू करा दिया था। हालांकि, भारी बरसात से कच्ची ईंट के खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। जिले में करीब 93 ईंट-भट्टे संचालित होते हैं। ईटों की सप्लाई बाधित होने के कारण कई गांवों में विकास कार्य अटके हुए हैं। सप्लाई शुरू होने के साथ ही यह कार्य अब शुरू होने वाले हैं।
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प्रदूषण को देखते हुए भट्टे किए जाते हैं बंद

एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने काफी समय से ईंट भट्टों का संचालन सीमित किया हुआ है। इन्हें चलाने के लिए साल में चार माह की छूट दी जाती है। 1 मार्च से 30 जून तक ही ईंट भट्टों का संचालन होता है। इस अवधि में भट्टा संचालक अधिक से अधिक ईंटों का उत्पादन करने का प्रयास करते हैं, ताकि भट्टों पर रोक लगाने के बाद ईंटों की सप्लाई लंबे समय तक सुचारू रह सके। इसके बावजूद भट्टे बंद होने के कुछ समय बाद ही ईंटों की कमी शुरू हो जाती है। इसका फायदा उठाते हुए भट्टा संचालक ईंटों के दाम बढ़ा देते हैं।

पिछले वर्ष जिले में 54 ईंट-भट्ठों का लाइसेंस किया गया था रद्द

पिछले वर्ष जिले में 54 ईंट-भट्ठों का लाइसेंस रद्द किया गया था। सीएम फ्लाइंग की टीम ने कई ईंट भट्टे पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया था। अधिकारियों के अनुसार रद्द किए लाइसेंस वाले भट्टे मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी।ईंट-भट्ठों को चलाने के लिए हर साल प्रदूषण, माइनिंग के अलावा अन्य कई विभागों की एनओसी लेनी जरूरी होती है। रेवाड़ी में काफी सारे ऐसे भट्टे भी थे, जिनके लाइसेंस 2015 के बाद रिन्यू ही नहीं हुए थे। इसके बाद उनकी विभाग की ओर से लिस्ट बनाई गई और उनके लाइसेंस रद किए गए थे।
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भट्टे खुलने से ईंट के दामों में कमी आएगी। कई माह से भट्टे बंद थे। ऐसे में ईंटों का स्टॉक भी समाप्त हो रहा था। हालांकि अब समस्या नहीं होगी।

मुकेश कुमार, महासचिव, ईंट भट्टा एसोसिएशन



ईंट भट्टे खुल रहे हैं। इसके साथ ही प्रदूषण के नियमों का भी पालन करना संचालकों को जरूरी है, ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।

हरीश कुमार, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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