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हरिद्वार से लौट रहे कांवड़िया की ट्राले की टक्कर से मौत, साथी घायल

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शहर के नारनौल रोड़ पर कांवड़ लेकर निकलते कांवड़िये - फोटो : Rewari
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हरिद्वार से कांवड़ लेकर गांव लौट रहे दो कांवड़ियों को शुक्रवार रात को दिल्ली-जयुपर हाईवे पर संगवाड़ी के पास तेज रफ्तार ट्राला ने टक्कर मार दी, दुर्घटना में 20 वर्षीय कांवडिये प्रदीप की मौत हो गई, जबकि उसका साथी खेमचंद गंभीर रूप से घायल हो गया। दुर्घटना के विरोध में साथी कांवड़ियों ने कुछ देर हंगामा करते हुए दुर्घटना के विरोध में नारेबाजी भी की। पुलिस ने अज्ञात ट्राला चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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पुलिस के अनुसार राजस्थान के सीकर जिले के गांव महरौली निवासी करीब 20 वर्षीय प्रदीप, खेमचंद, मनीष कुमार, संदीप, मुकेश, श्याम सिंह और शैतान सिंह हरिद्वार कांवड़ लेने के लिए 17 जुलाई को घर से गए थे। कांवड़ उठाने के बाद सभी साथी दिल्ली-जयुपर हाईवे से होते हुए अपने गांव लौट रहे थे। शुक्रवार को संगवाड़ी गांव के पास पीछे से तेज गति से आ रहे एक ट्राले ने प्रदीप व खेमचंद को टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद साथी कांवड़ियों ने शोर मचा दिया। ट्राला चालक ट्राला लेकर भाग गया। कांवड़ियों ने कुछ देर रोष प्रदर्शन भी किया, लेकिन सूचना मिलते ही पुलिस व एंबुलेंस मौके पर पहुंच गई। दोनों घायलों को ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्रदीप को मृत घोषित कर दिया। जबकि घायल खेमचंद का इलाज किया जा रहा है। कसौला थाना पुलिस ने शनिवार सुबह करीब आठ बजे पोस्टमार्टम कराने के बाद प्रदीप का शव परिजनों को सौंप दिया।
प्रदीप की मौत से गांव में छाया मातम
प्रदीप चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था। वह अविवाहिता था और अपने गांव में ही परचून की दुकान चलाता था। पिता ऑटो चलाते हैं। सहज स्वभाव के प्रदीप की मौत के बाद उसके गांव में मातम छा गया है।
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हाईवे पर सुरक्षित नहीं है कांवड़ियों का सफर
वैसे तो जिले में कांवड़ियों केे सुरक्षा के पुलिस व प्रशासन ने कड़े इंतजाम करने का दावा कर रहा है। हालांकि शहर में धारा 144 लागू कर बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, लेकिन करीब चालीस किलोमीटर के दिल्ली-जयपुर हाईवे कांवड़ियों का सफर सुरक्षित नहीं है। शुक्रवार रात को ट्राला की टक्कर से कांवड़िये की मौत के बाद अमर उजाला संवाददाता ने एनएच आठ की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। जिसमें तेज रफ्तार वाहनों के बीच कांवड़िये स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
जिले कापड़ीवास गांव से लेकर जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर तक दिल्ली-जयुपर हाईवे नंबर आठ का लगभग चालीस किलोमीटर का सफर है। राजस्थान की ओर जाने वाले कांवड़ियों ने आना शुरू कर दिया है। शाम को हाईवे पर कांवड़ियों की जमघट दिखाई देने लगा है, लेकिन हाईवे पर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी है।
शनिवार दोपहर को अमर उजाला ने हाईवे नंबर आठ की सुरक्षा जायजा लिया। हालांकि एक-दो स्थानों पर पुलिस की जिप्सी व करीब आधा दर्जन स्थानों पर पुलिसकर्मी भी दिखाई दिए, लेकिन तेज रफ्तार वाहनों से कांवड़ियों के बचाव के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं थे। कांवड़ यात्रा के अंतिम सप्ताह में नेशनल हाइवे की एक लाइन को बंद कर दिया जाता है, लेकिन इस बार अभी तक ऐसा नहीं किया गया है। नेशनल हाईवे पर लगाए गए कांवड़ शिविरों पर पुलिसकर्मियों के तैनात रहने के आदेश है, लेकिन शिविरों से भी पुलिस कर्मी नदारद थे।
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