भिवाड़ी। खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से निकल रहे रसायनिक और दूषित पानी के मामले में केंद्र सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों को शिकायत पत्र भेजा था। इसको संज्ञान में लेते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 19 फरवरी को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पत्र में बताया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त जन शिकायत को गंभीर पर्यावरणीय विषय मानते हुए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तत्काल जांच कके।
शिकायत में उठाए गए बिंदुओं का सत्यापन करने तथा पर्यावरण नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही इस मामले में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शिकायत में उल्लेख किया गया था कि खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से निकल रहा जहरीला और रसायनिक पानी खुले में बह रहा है, जो आसपास की कृषि भूमि, खाली जमीन और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की ओर जा रहा है।
इससे हरियाणा के सीमावर्ती गांवों और साहबी नदी के कैचमेंट क्षेत्र तक प्रदूषण पहुंचने की गंभीर आशंका है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो इससे भूजल, कृषि उत्पादन, पशुधन और आमजन के स्वास्थ्य पर दीर्घकालीन और गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
केंद्रीय स्तर पर इस शिकायत को संज्ञान में लिए जाने के बाद अब संबंधित औद्योगिक इकाइयों की जांच, प्रदूषण के स्रोत की पहचान और पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
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प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की तय हो जिम्मेदारी
खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से निकल रहा रसायनिक और दूषित पानी लंबे समय से पर्यावरण, कृषि भूमि और आसपास के गांवों ओर साहबी नदी क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। इस संबंध में प्रधानमंत्री, पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शिकायत भेजी गई थी, जिस पर अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आधिकारिक रूप से संज्ञान लेते हुए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है। उम्मीद है कि जांच के बाद प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की जिम्मेदारी तय होगी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे भविष्य में इस प्रकार के प्रदूषण को रोका जा सके और पर्यावरण तथा आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।