संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। उपायुक्त राहुल हुड्डा ने किसानों से दानेदार यूरिया की जगह नैनो तरल यूरिया का इस्तेमाल कर उपज बढ़ाने की अपील की है। बताया कि नैनो तरल यूरिया आधा लीटर की शीशी में खाद की एक बोरी यूरिया से कहीं ज्यादा असरदार है।
डीसी ने बताया कि भारत नैनो तरल यूरिया को लांच करने वाला पहला देश है। इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर को-आपरेटिव लिमिटेड इफको ने इसे लॉन्च किया था। इफको के मुताबिक धान, आलू, गन्ना, गेहूं और सब्जियों समेत सभी फसलों में इसके बेहद अच्छे परिणाम मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नैनो तरल यूरिया के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा है कि धान, गेहूं, तिलहन और सब्जियां जो भी उगाई जाती हैं उनकी क्वालिटी बढ़ती है। आधा लीटर यूरिया की शीशी पूरे एक एकड़ खेत के लिए काफी है। साथ में इसका प्रयोग करने से पर्यावरण, जल और मिट्टी में जो प्रदूषण हो रहा है वो नहीं होगा। नैनो तरल यूरिया का छिड़काव फसल की पत्तियों पर होता है। छिड़काव के लिए एक लीटर पानी में 2 से 4 मिलीलीटर नैनो यूरिया मिलाना होता है। 15 लीटर की टंकी में फसल की जरूरत के अनुसार 30 से 60 मिलीलीटर मिलाना होता है।
डीसी ने बताया कि एक फसल में दो बार नैनो यूरिया का छिड़काव करना चाहिए। वैज्ञानिकों के मुताबिक नैनो तरल यूरिया के कणों का साइज इतना कम है कि ये पत्ती से सीधे पौधे में प्रवेश कर जाता है।