रेवाड़ी। बारिश का मौसम शुरू होते ही सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगी है। बारिश का पानी बिल में घुसने से सांप बाहर निकल रहे हैं। पिछले एक महीने में ही 29 से ज्यादा सर्पदंश की घटनाएं हुई हैं। औसतन हर दिन किसी न किसी को सांप ने डसा है। मानसून की शुरूआत होने के बाद अभी तक 40 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। राहत की बात है कि अभी तक सर्पदंश से किसी की मौत नहीं हुई है।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. भंवर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सीएचसी, पीएचसी सहित अन्य अस्पतालों में 300 एंटी स्नैक डोज पहुंचा दी है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। डॉक्टर के अनुसार जिले में सांपों की पांच तरह की प्रजाति पाई जाती है और यही सबसे ज्यादा खतरनाक भी है।
इनके काटने पर मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिले तो उसकी मौत भी हो सकती है। कुछ सावधानियां बरती जाएं तो सर्पदंश के मामलों में होने वाली बड़ी घटनाओं से बचा जा सकता है।
सबसे ज्याद यह पांच प्रजातियों के सांप
किंग कोबरा : यह पूंछ हिलाता हुआ चलता है, इसे नाग भी कहते है। खतरा महसूस होने पर यह फन उठाता है और फुंफकारता है। इसके काटने पर मरीज की सांस रुक जाती है।
रसैल वाइपर : इसे स्थानीय भाषा में चीती बोलते हैं। यह प्रेशर कूकर की सीटी की तरह आवाज निकालता है। अजगर की तरह दिखता है और सबसे ज्यादा खेतों में मिलता है। इसके काटने पर शरीर में खून पतला हो जाता है और ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।
करैत : यह काले रंग का होता है और सफेद रंग की इस पर रिंग जैसे बैंड बने होते हैं। यह घरों में गर्मी की तलाश में और चूहे खाने आता है। इसके काटने पर भी खून पतला होता है और ब्लीडिंग होती है।
अफाई : अफाई को इचिस कैरिनेटस कहा जाता है। यह छोटा और विषैला सांप है, जिसका सिर तिकोना और इसकी सफेद रंग की भूरी पृष्ठभूमि पर एक तीर का निशान बना रहता है। इस सांप का आहार छोटे मेंढ़क, छिपकलियां, सांप, बिच्छु तथा अनेक प्रकार के कीट हैं। इन्हें अक्सर खुली चट्टानों पर भी देखा गया है। इसके काटने से मौत भी हो सकती है।
कॉमन कोबरा : भारतीय कोबरा, जिसे सामान्य कोबरा या नाग भी कहा जाता है, भारत में पाया जाने वाला एक विषैला सांप है। यह एक बड़ा सांप है, जिसकी लंबाई 4 से 7 फीट तक हो सकती है। कोबरा का जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, जिसका मतलब है कि यह तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। कोबरा के काटने से लकवा, सांस लेने में तकलीफ और यहां तक कि मौत भी हो सकती है।
अस्पताल जाने से पहले यह सावधानियां बरतें
डॉक्टर के अनुसार, पीड़ित को तसल्ली देकर शांत करें ताकि ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहे। जितना बीपी बढ़ेगा, शरीर में जहर उतनी ही तेजी से फैलेगा। जिस जगह भी सांप कांटे उसके पास रूमाल को इतना टाइट बांधे कि कसावट में पैंसिल आ जाए। सर्पदंश की जगह कट नहीं लगाए, जहर मुंह से नहीं खींचे। पीड़ित को सोने नहीं दें। सांप ने हाथ में काटा है तो हाथ फोल्ड कर इस तरह से लटकाएं कि जैसे फ्रेक्चर हुआ हो। पीड़ित को खड़ा न होने दें। चलने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा।
सर्पदंश के समय भयभीत नहीं होना चाहिए। डर से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचकर इलाज कराना चाहिए। खेतों में गम शूज पहन कर जाएं। खेत में लकड़ी से फल हिलाते हुए चलें, ताकि सांप खिसक जाए। मेड़ों और जमीन पर नहीं सोएं। यदि किसी को सांप काटता है तो वह ट्रामा सेंटर में जाकर वैक्सीन लगवा सकता है।
- डॉ. भंवर सिंह, डिप्टी सिविल सर्जन, रेवाड़ी