संवाद न्यूज एजेंसी
डहीना। सामाजिक संगठन आवाज फाउंडेशन की अगुवाई में गांव सीहा में अनुसूचित जाति के प्रतिनिधियों की बैठक मंगलवार को हुई। इसमें शामिल 11 गांवों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से मृत्युभोज की प्रथा बंद करने का निर्णय लिया।
बैठक में सीहा, ढाणी ठेठर बाढ़, निमोठ, कंवाली, गोठड़ा टप्पा डहीना, लिसान, दखोरा, फतेहपुरी, दड़ौली और खुशपुरा के अनुसूचित जाति के लोग मौजूद रहे। अध्यक्षता सीहा गांव के वरिष्ठ नागरिक जय नारायण ने की।
इस दौरान मृत्युभोज को बंद करने पर विचार किया गया और इसे बंद करने का निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस कुप्रथा को बंद करने के लिए समाज के सभी लोगों को जागरूक करने, कानूनी प्रावधानों का पालन करने और वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बैठक की गई।
कहा कि मृत्युभोज को बंद करना एक लंबी प्रक्रिया जरूर है। इसमें समय लगेगा लेकिन अगर समाज के सभी लोग मिलकर काम करें तो जल्दी ही इस कुप्रथा को बंद किया जा सकता है।
कार्य कहने में आसान, परंतु करने में कठिन अवश्य है, असंभव नहीं। आज के आधुनिक समाज में सुधार के लिए इन कुरीतियों को खत्म करने के लिए अपने समाज के लोगों को ही अगुवाई करनी पड़ेगी।
आवाज फाउंडेशन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र रंगा लिसानिया व प्रदेश महासचिव सूबेदार मेजर सत्य नारायण सांभरिया निमोठ ने कहा कि हमारे समाज में ना जाने कितनी ही कुप्रथाएं हैं जिन्हें समाज के ही कुछ ठेकेदारों ने अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए इनका चलन शुरू किया था। इसी में मृत्युभोज भी शामिल है।
मृत्युभोज में शामिल नहीं होने का निर्णय
बैठक में उपस्थित ग्यारह गांवों के सभी प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर युक्त लिखित प्रस्ताव पास किया। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 15 जुलाई से मृत्युभोज का आयोजन नहीं किया जाएगा। अगर कोई मृत्युभोज का आयोजन करेगा तो उसमें हम शामिल नहीं होंगे। मृत्युभोज जैसी कुप्रथा को त्याग कर आज के समय में जीवित माता-पिता की वृद्धावस्था में सेवा करने पर जोर दिया गया। कुप्रथाओं से धन बचाकर अपने बच्चों की उच्च शिक्षा पर खर्च किये जाने का आह्वान किया गया।